facebookmetapixel
रेट कट का असर! बैंकिंग, ऑटो और रियल एस्टेट शेयरों में ताबड़तोड़ खरीदारीTest Post कैश हुआ आउट ऑफ फैशन! अक्टूबर में UPI से हुआ अब तक का सबसे बड़ा लेनदेनChhattisgarh Liquor Scam: पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को ED ने किया गिरफ्तारFD में निवेश का प्लान? इन 12 बैंकों में मिल रहा 8.5% तक ब्याज; जानिए जुलाई 2025 के नए TDS नियमबाबा रामदेव की कंपनी ने बाजार में मचाई हलचल, 7 दिन में 17% चढ़ा शेयर; मिल रहे हैं 2 फ्री शेयरIndian Hotels share: Q1 में 19% बढ़ा मुनाफा, शेयर 2% चढ़ा; निवेश को लेकर ब्रोकरेज की क्या है राय?Reliance ने होम अप्लायंसेस कंपनी Kelvinator को खरीदा, सौदे की रकम का खुलासा नहींITR Filing 2025: ऑनलाइन ITR-2 फॉर्म जारी, प्री-फिल्ड डेटा के साथ उपलब्ध; जानें कौन कर सकता है फाइलWipro Share Price: Q1 रिजल्ट से बाजार खुश, लेकिन ब्रोकरेज सतर्क; क्या Wipro में निवेश सही रहेगा?Air India Plane Crash: कैप्टन ने ही बंद की फ्यूल सप्लाई? वॉयस रिकॉर्डिंग से हुआ खुलासा

FPI: बिकवाली का सिलसिला जारी, नवंबर के 10 दिनों में ही करीब 6 हजार करोड़ रुपये की निकासी

एक्सपर्ट्स का मानना है कि वर्तमान में सोने और अमेरिकी डॉलर जैसी सेफ-हैवन एसेट्स पर फोकस बढ़ाया जा सकता है।

Last Updated- November 12, 2023 | 12:40 PM IST
The market succumbed to the selling by foreign investors, FPI has withdrawn Rs 21,272 crore so far in February विदेशी निवेशकों की बिकवाली के आगे बाजार ने टेके घुटने, FPI ने फरवरी में अब तक 21,272 करोड़ रुपये निकाले

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI की बिकवाली का सिलसिला जारी है। आंकड़ों पर नजर डालें तो FPI ने नवंबर में अब तक भारतीय शेयर बाजारों से 5,800 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये बिकवाली बढ़ती ब्याज दरों और मिडिल-ईस्ट में जियो-पॉलिटिकल टेंशन के चलते देखी जा रही है।

डिपॉजिटरी के आंकड़ों पर नजर डालें तो FPI ने इसके पहले यानी अक्टूबर महीने में में 24,548 करोड़ रुपये और सितंबर में 14,767 करोड़ रुपये निकाले थे।

डिपॉजिटरी के आंकड़े बताते हैं कि 1-10 नवंबर के दौरान FPI ने 5,805 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि ‘सितंबर महीने में जो एफपीआई की बिकवाली शुरू हुई वो अक्टूबर में देखी गई और अब इस महीने यानी नवंबर में ऐसा ही देखने को मिल सकता है। हालांकि इस महीने बिक्री की रफ्तार में कमी जरुर देखी जा रही है।

बिकवाली के कारणों को समझें तो इसका मुख्य कारण इजरायल और हमास के बीच संघर्ष के साथ अमेरिकी ट्रेजरी बांड यील्ड में बढ़ोतरी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि वर्तमान में सोने और अमेरिकी डॉलर जैसी सेफ-हैवन एसेट्स पर फोकस बढ़ाया जा सकता है।

चुनावों से पहले बाजार में रह सकती है तेजी

आम चुनावों से पहले शेयर बाजार में तेजी की संभावना है जैसा कि पिछले पांच आम चुनावों के दौरान हुआ था। बिकवाली की शुरुआत से पहले मार्च से अगस्त तक 6 महीनों में लगातार विदेशी निवेशकों ने खरीदारी की थी। इस अवधि के दौरान 1.74 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया।

 

First Published - November 12, 2023 | 12:40 PM IST

संबंधित पोस्ट