भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी हुई है। तेल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 105 से 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है।
नई बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 97.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 90.67 रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं मुंबई में पेट्रोल 106.68 रुपये प्रति लीटर और डीजल 93.14 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है।
शिनहान बैंक के ट्रेजरी हेड कुनाल सोधानी के मुताबिक, ईंधन की कीमतों में हर 1 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से खुदरा महंगाई यानी सीपीआई पर 4 से 6 बेसिस पॉइंट तक असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने का असर सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, खेती और खाने-पीने की चीजों की कीमतों तक पहुंचता है।
कुनाल सोधानी ने कहा कि डीजल भारतीय सप्लाई चेन की रीढ़ है, क्योंकि ट्रक, रेलवे, खेती और फैक्ट्रियों में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। ऐसे में डीजल महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ती है, जिसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है। अनुमान है कि ईंधन की कीमतों में 5 से 10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई को 0.20 प्रतिशत से 0.30 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है।
उन्होंने कहा कि महंगे कच्चे तेल का असर भारतीय रुपये पर भी पड़ता है। भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ता है और तेल कंपनियों की डॉलर की मांग भी बढ़ जाती है। इससे चालू खाता घाटा बढ़ने और रुपये पर दबाव आने का खतरा रहता है।
कुनाल सोधानी के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत का सालाना आयात बिल करीब 15 से 18 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है।
बाजार पहले ही कच्चे तेल की कीमतों को करीब 59 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक जाते देख चुका है। शुरुआत में तेल मार्केटिंग कंपनियों ने बढ़ी कीमतों का कुछ बोझ खुद उठाया। इसके बाद सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की। हालांकि, लंबे समय तक वैश्विक कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के असर को रोक पाना आसान नहीं माना जाता। आखिरकार इसका बोझ खुदरा ग्राहकों तक पहुंचना तय माना जा रहा है।
कुनाल सोधानी के मुताबिक, डॉलर के मुकाबले रुपये में 94.20 का स्तर मजबूत आधार बना हुआ है। लेकिन अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और वैश्विक स्तर पर डॉलर मजबूत रहता है, तो डॉलर-रुपया एक्सचेंज रेट 96.50 से 96.80 के स्तर तक जा सकता है।