अर्थव्यवस्था

Fuel Price Update: क्या बढ़ने वाले हैं पेट्रोल-डीजल के दाम? RBI गवर्नर के बयान से बढ़ी चिंता

Fuel Price Update: पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच बढ़ते कच्चे तेल के दबाव से भारत में ईंधन कीमतें और महंगाई बढ़ने की आशंका जताई गई है।

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- May 13, 2026 | 3:28 PM IST

Fuel Price Update: रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि अगर पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है, तो भारत में खुदरा ईंधन (पेट्रोल और डीजल) की कीमतों में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।

उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से स्वैच्छिक रूप से बचत करने की अपील की है। उन्होंने पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और सोने की खरीद को टालने जैसी सलाह दी है, ताकि देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम किया जा सके।

आयात नियंत्रण के लिए सरकारी कदम

सरकार ने पहले ही सोने पर आयात शुल्क बढ़ा दिया है और आगे भी ऐसे कदम उठाए जा सकते हैं, जिससे आयात की मांग को नियंत्रित किया जा सके।

संजय मल्होत्रा ने यह बात स्विट्ज़रलैंड में आयोजित एक सम्मेलन में कही, जिसे स्विस नेशनल बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने मिलकर आयोजित किया था। उन्होंने यह भी बताया कि अब तक सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है और सरकारी तेल कंपनियां बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों का बोझ खुद उठा रही हैं।

अप्रैल में भारत की महंगाई दर बढ़कर 3.48 प्रतिशत हो गई, जो मार्च में 3.40 प्रतिशत थी। हालांकि यह अनुमान से कम रही, क्योंकि सरकार ने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर खुद वहन किया। लेकिन अभी भी जोखिम बने हुए हैं, क्योंकि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा की कीमतों में तेजी का असर भारत पर भी पड़ रहा है।

इस क्षेत्र में सप्लाई-चेन में आ रही बाधाओं का असर अब भारत पर दिखने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में भले ही लचीली मुद्रास्फीति लक्ष्य प्रणाली मौजूद है, लेकिन ऐसे हालात में यह पर्याप्त नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर यह आपूर्ति से जुड़ा झटका बड़ा होता है, तो राजकोषीय नीति और मौद्रिक नीति के बीच बेहतर समन्वय बहुत जरूरी हो जाता है।

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विकास और महंगाई का अनुमान

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस वित्त वर्ष के लिए 6.9 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान लगाया है, जबकि महंगाई औसतन 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। हालांकि अर्थशास्त्रियों का मानना है कि संघर्ष के कारण आगे चलकर विकास दर में कमी आ सकती है और महंगाई में बढ़ोतरी हो सकती है। अप्रैल में RBI ने अपनी प्रमुख रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा था।

RBI गवर्नर ने कहा कि बैंक अब पूरी तरह से डेटा पर निर्भर है और हर बैठक के आधार पर निर्णय लिया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय बैंक स्थिति को लचीले तरीके से देख रहा है और यदि यह झटका अस्थायी है तो उसे नजरअंदाज किया जा सकता है, लेकिन अगर यह स्थायी हो जाता है तो जरूरी कदम उठाए जाएंगे। RBI की अगली मौद्रिक नीति बैठक 5 जून को निर्धारित है।

First Published : May 13, 2026 | 3:19 PM IST