पश्चिम एशिया में संघर्ष से आपूर्ति प्रभावित होने के मद्देनजर सरकार ने 15 दिन के लिए डीजल और पेट्रोल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में कटौती की है और 3 महीने के लिए 40 पेट्रोलियम उत्पादों को सीमा शुल्क से छूट दी है। इसके अलावा सरकार ने डीजल और विमानन ईंधन (एटीएफ) पर निर्यात शुल्क लगाया है। अधिकारियों के अनुसार उत्पाद शुल्क में बदलाव से 15 दिन में सरकारी खजाने को करीब 5,500 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। उत्पाद शुल्क में कटौती से 7,000 करोड़ रुपये का नुकसान और निर्यात शुल्क लगाने से 1,500 करोड़ रुपये का लाभ समायोजित करने करने के बाद राजस्व नुकसान का यह अनुमान लगाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि तीन महीने के लिए सीमा शुल्क से राजस्व नुकसान 1,800 करोड़ रुपये होने की संभावना है।
यदि शुल्क में यह छूट पूरे वित्त वर्ष 2026-27 में जारी रहा तो पेट्रोलियम पर उत्पाद शुल्क में बदलाव से राजकोष को शुद्ध 1.32 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होगा। यह 3.9 लाख करोड़ रुपये के उत्पाद शुल्क संग्रह के बजट अनुमान का लगभग एक-तिहाई होगा। इतना ही नहीं इससे उत्पाद शुल्क संग्रह वित्त वर्ष 2022-23 के स्तर से भी नीचे आ जाएगा।
सीमा शुल्क का गणित थोड़ा अलग है। यदि सीमा शुल्क में बदलाव बरकरार रहा तो वित्त वर्ष 2026-27 में सरकारी खजाने पर 7,200 करोड़ रुपये का प्रभाव पड़ेगा। यह वित्त वर्ष 2027 के लिए 2.7 लाख करोड़ रुपये के सीमा शुल्क संग्रह के बजट अनुमान का केवल 2.6 फीसदी है।
कुल उत्पाद शुल्क संग्रह में पेट्रोलियम पर उत्पाद शुल्क की हिस्सेदारी लगभग 90 फीसदी है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जुलाई 2017 से अधिकांश अन्य उत्पादों के लिए उत्पाद शुल्क को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) में शामिल कर लिया गया था। अब केवल पेट्रोलियम, तंबाकू और सिगरेट जैसे कुछ अन्य उत्पादों पर ही उत्पाद शुल्क लगता है।