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समावेशी डिजिटलीकरण बढ़ाने के लिए यूपीआई-आधार अपनाएं जी-20 देश

Last Updated- December 11, 2022 | 1:53 PM IST

दुनियाभर में समावेशी डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने के लिए जी-20 देशों को यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) और आधार जैसे विभिन्न व्यवस्था में काम करने वाले मंचों को बनाने और अपनाने की जरूरत है। उद्योग और व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव अनुराग जैन ने सोमवार को यह बात कही। 

औद्योगिक लॉबी समूह भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा आयोजित बी-20 इंडोनेशिया वैश्विक वार्ता में जैन ने कहा, ‘जी-20 देशों को दुनियाभर में समावेशी डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने के लिए ऐसे खुले स्रोत और अतर संचालनीय प्लेटफॉर्मों और मानकों  के लिए मार्गदर्शक सिद्धांतों को बनाने व अपनाने की दिशा में काम करना चाहिए।’जैन ने कहा कि वैश्विक स्तर पर स्टार्टअप्स की वृद्धि वित्त तक पहुंच, उचित मार्गदर्शन और नीति समर्थन के संबंध में कई चुनौतियों से कम हो गई हैं।
उन्होंने कहा, ‘इन मुद्दों पर विचार करने के लिए भारत ने अपने जी-20 अध्यक्षता के तहत स्टार्टअप-20 जैसे एक नए समूह का प्रस्ताव रखा है।’ बिजनेस-20 (बी-20) का गठन 2010 में किया गया था और यह वैश्विक व्यापार समुदाय के साथ आधिकारिक जी-20 वार्ता मंच है। बी-20 का उद्देश्य आर्थिक वृद्धि और विकास और बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक अध्यक्ष द्वारा प्राथमिकताओं पर ठोस कार्रवाई योग्य नीतिगत सिफारिशें देना है। 
इंडोनेशिया ने इस साल जी-20 की अध्यक्षता पाई है। सभी नजरें भारत की ओर हैं क्योंकि अगले साल उसके पास एक साल के लिए जी-20 की अध्यक्षता रहेगी, जो दिसंबर से शुरू होगी। 
भारत के जी-20 शेरपा अमिताभ कांत ने कहा कि मंच को विश्वभर में आर्थिक विकास और वित्त प्रगति को आगे बढ़ाना चाहिए। खासकर ऐसे समय में जब रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान दुनिया विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रही है और इसका खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। 
जी-20 देशों को इस संघर्ष के बावजूद इन सभी मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए और दुनिया को आगे ले जाने वाले कुछ सिद्धांतों पर पहुंचना चाहिए। कांत ने कहा, ‘यह महत्वपूर्ण है जब तक भारत जी-20 की अध्यक्षता संभालेगा, वैश्विक विकास प्रभावित होगा और वैश्विक विकास को गति देने के लिए जी-20 के अलावा कोई और मंच नहीं है।’

 

First Published - October 10, 2022 | 10:38 PM IST

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