अर्थव्यवस्था

भारत सोना न खरीदे तो क्या होगा? मोतीलाल ओसवाल ने दिए चौंकाने वाले आंकड़े, PM की अपील के पीछे ये बड़े कारण

मोतीलाल ओसवाल के आंकड़े बताते हैं कि भारत ने एक साल में सोना खरीदने पर करीब 72 अरब डॉलर खर्च कर दिए। भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% सोना दूसरे देशों से मंगाता है

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ऋषभ राज   
Last Updated- May 12, 2026 | 4:42 PM IST

भारत और सोने का रिश्ता सदियों पुराना है। हमारे यहां सोना सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि सुरक्षा का अहसास और परंपरा का हिस्सा है। लेकिन साल 2026 में वैश्विक आर्थिक हालात कुछ ऐसे बन गए हैं कि अब इस ‘पीली धातु’ की चमक भारतीय अर्थव्यवस्था की आंखों में चुभने लगी है। हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से कम से कम एक साल तक सोने की खरीद न करने का आह्वान किया। इसके बाद चारों ओर चर्चा होने लगी की आखिर ऐसा क्या संकट आ गया कि प्रधानमंत्री को मंच से यह ऐलान करना पड़ा।

इसको लेकर मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने नए आंकड़े जारी किए हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि भारत ने एक साल में सोने पर करीब 72 अरब डॉलर खर्च कर दिए। भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% सोना दूसरे देशों से मंगाता है। हर साल देश में 700 से लेकर 800 टन सोने की खपत होती है, लेकिन देश के अंदर गोल्ड प्रोडक्शन केवल एक से दो टन तक ही हो पाता है।

डॉलर का ‘आउटगोइंग’ और रुपये का सिरदर्द

किसी भी देश की सेहत उसके ‘करेंट अकाउंट डेफिसिट’ (CAD) से मापी जाती है। आसान भाषा में कहें तो, देश से कितने डॉलर बाहर जा रहे हैं और कितने अंदर आ रहे हैं। साल 2026 के लिए भारत का अनुमानित CAD करीब 84.5 अरब डॉलर रहने वाला है। गौर करने वाली बात यह है कि इस घाटे का एक बहुत बड़ा हिस्सा सिर्फ सोने की वजह से है।

चूंकि सोने की अपनी जरूरत के लिए लगभग पूरी तरह आयात पर निर्भर है तो जब भी आप या हम सोने की चेन या सिक्का खरीदते हैं, तो भारत सरकार को उसके बदले अंतरराष्ट्रीय बाजार में ‘डॉलर’ चुकाने पड़ते हैं। आंकड़े गवाह हैं कि भारत के कुल 775 अरब डॉलर के आयात बिल में अकेले सोने की हिस्सेदारी 10% के करीब है।

आज की स्थिति और भी गंभीर है क्योंकि दुनिया भर में युद्ध और अनिश्चितता का माहौल है। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं। भारत अपनी जरूरत का 88% तेल बाहर से मंगाता है, जिस पर 134.7 अरब डॉलर खर्च हो रहे हैं। एक तरफ तेल की मजबूरी और दूसरी तरफ सोने की खरीदारी, इन दोनों ने मिलकर डॉलर की मांग को आसमान पर पहुंचा दिया है, जिससे भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है।

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गणित जो अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकता है

प्रधानमंत्री की अपील के पीछे का असली तर्क ‘बचत’ में छिपा है। अगर हम सिर्फ सोने के प्रति अपने मोह को थोड़ा नियंत्रित कर लें, तो अर्थव्यवस्था को मिलने वाली राहत किसी बड़े आर्थिक पैकेज से कम नहीं होगी। मोतीलाल ओसवाल के डेटा के मुताबिक, अगर भारत में सोने की मांग में सिर्फ 30 से 40 फीसदी की गिरावट आती है, तो सीधे तौर पर 20 से 25 अरब डॉलर बच सकते हैं।

अगर यह गिरावट 50 फीसदी तक पहुंच जाए, तो करीब 36 अरब डॉलर की बचत होगी। यह रकम कितनी बड़ी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह हमारे कुल व्यापार घाटे (CAD) का लगभग आधा हिस्सा है। जब डॉलर की यह भारी-भरकम निकासी रुकेगी, तो विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) मजबूत होंगे और रुपये की गिरावट पर लगाम लगेगी। यह एक तरह का ‘सुरक्षा कवच’ है जो कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच देश को दिवालिया होने या बड़ी महंगाई से बचा सकता है।

किस देश से कितना सोना खरीदता है भारत

भारत सोने के आयात को लेकर तीन देशों पर निर्भर है। ताजा आंकड़ों (FY26) के अनुसार, स्विट्जरलैंड भारत के लिए सोने का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है, जिसकी कुल आयात में लगभग 40% हिस्सेदारी है। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का नंबर आता है, जहां से करीब 16% सोना आता है (हालांकि ‘मुक्त व्यापार समझौते’ के कारण दुबई के जरिए होने वाले आयात में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है)। तीसरा बड़ा नाम दक्षिण अफ्रीका है, जो भारत की सोने की जरूरत का करीब 10% हिस्सा पूरा करता है। साथ ही भारत पेरू से लगभग 8% सोना मंगवाता है। इनके अलावा ऑस्ट्रेलिया और बोलीविया जैसे देशों से भी कच्चा या रिफाइंड सोना भारत आता है।

निवेश का तरीका बदलें, इरादा नहीं

यहां समझने वाली बात यह है कि सरकार आपसे सोने में निवेश बंद करने को नहीं कह रही है। मुद्दा सोने में निवेश करने का नहीं, बल्कि उसे खरीदने के ‘तरीके’ का है। जब आप फिजिकल गोल्ड यानी गहने या सिक्के खरीदते हैं, तो देश का पैसा बाहर जाता है। लेकिन इसी का एक स्मार्ट विकल्प है ‘पेपर गोल्ड’ या ‘गोल्ड ईटीएफ’ (Gold ETF)।

स्मार्ट निवेशक अब इसी रास्ते को चुन रहे हैं। गोल्ड ETF में निवेश करने पर आपको सोने की बढ़ती कीमतों का पूरा फायदा मिलता है, लेकिन इसके लिए सरकार को बाहर से सोना मंगाने की जरूरत नहीं पड़ती। यह पैसा देश के बैंकिंग सिस्टम के भीतर ही रहता है और अर्थव्यवस्था के पहिये को घुमाने में मदद करता है।

First Published : May 12, 2026 | 4:27 PM IST