गोल्डमैन सैश (Goldman Sachs) ने वर्ष 2023 के लिए भारत की वृद्धि दर का अनुमान 6.9 फीसदी से घटाकर 5.9 फीसदी कर दिया है। ग्लोबल इनवेस्टमेंट बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विस फर्म की रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना महामारी के बाद इकॉनमी की री-ओपनिंग का जो फायदा मिल रहा था, वो अगले साल की पहली छमाही में कम हो जाएगा। इसके अलावा महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दरों में जिस तरह बढ़ोतरी की गई है, उसका असर भी डिमांड पर दिखने लगेगा।
गोल्डमैन की इस ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, ‘2023 में भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी साल के दोनों हिस्सों में अलग रहेगी। पहले छह महीनों में ग्रोथ की रफ्तार धीमी रहेगी, क्योंकि कोरोना के बाद डिमांड में आई तेज रिकवरी यानी पेंट-अप डिमांड में कमी आएगी जबकि मॉनेटरी पॉलिसी में सख्ती से घरेलू डिमांड पर असर पड़ सकता है। वहीं, अगले छह महीनों में ग्रोथ में दोबारा तेजी आएगी, क्योंकि वैश्विक स्तर पर ग्रोथ में रिकवरी होगी । साथ ही निर्यात सुधरेगा और निवेश में भी उछाल आएगा।
इससे पहले मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने पिछले हफ्ते 2022 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान पहले के 7.7 फीसदी से घटाकर शुक्रवार को 7 फीसदी कर दिया । यह दूसरी बार है जब मूडीज ने भारत की वृद्धि के अनुमान को घटाया है। इससे पहले मई में मूडीज ने 2022 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर 8.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था जिसे सितंबर में घटाकर 7.7 फीसदी कर दिया था।