अर्थव्यवस्था

कॉरपोरेट कानून में बड़े बदलाव की तैयारी: अब आसान होगा बिजनेस, NFRA को मिलेंगी और ज्यादा ताकतें

विधेयक में विलय और एकीकरण के लिए सरल प्रक्रिया और छोटी कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) की जरूरत में ढील देने का प्रस्ताव है

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रुचिका चित्रवंशी   
Last Updated- March 23, 2026 | 10:30 PM IST

केंद्र सरकार ने कॉरपोरेट कानून संशोधन विधेयक में कई महत्त्वपूर्ण बदलावों का प्रस्ताव किया है। लोक सभा में आज पेश विधेयक में विभिन्न प्रक्रियात्मक चूक को अपराध की श्रेणी से बाहर करने, राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (एनएफआरए) को मजबूत करने, गैर-ऑडिट सेवाओं के लिए सख्त प्रावधान करने और शेयरों की पुनर्खरीद (बाय बैक) में लचीलेपन जैसे महत्त्वपूर्ण बदलावों का प्रस्ताव है।  

विधेयक में विलय और एकीकरण के लिए सरल प्रक्रिया और छोटी कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) की जरूरत में ढील देने का प्रस्ताव है। निवेशकों के अनुकूल वातावरण बनाने के लिए अवधारणा पेश करते हुए विधेयक में ट्रस्ट के रूप में गठित वैकल्पिक निवेश निधियों (एआईएफ) को सीमित देयता भागीदारी (एएलपी) में बदलने की सुविधा के लिए प्रावधान लाए हैं, जिससे अनुपालन आसान हो जाएगा।

 कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय की सचिव दीप्ति गौर मुखर्जी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘विधेयक में प्रस्तावित परिवर्तनों के पीछे मुख्य विचार सभी के लिए व्यापार सुगमताऔर छोटी कंपनियों के लिए अनुपालन में आसानी लाना है।’सरकार ने ऑडिट फर्मों के लिए एक कूलिंग-ऑफ अवधि का प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत वे ऑडिट अवधि पूरी होने के 3 साल तक किसी कंपनी या उसकी होल्डिंग कंपनी या सहायक कंपनी को गैर-ऑडिट सेवाएं प्रदान नहीं कर सकेंगी।

विधेयक में एनएफआरए से संबंधित विभिन्न प्रावधानों का उद्देश्य नियामक को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी), भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) और भारतीय दिवाला और ऋणशोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) जैसे अन्य नियामकों के समकक्ष लाना है। इस विधेयक में पेश प्रावधान से एनएफआरए को ऐसे नियम बनाने की ताकत मिलेगी, जिससे उसके कामकाज का संचालन होता है और वह अपने सदस्यों व अधिकारियों को कार्य सौंप सकेगा। यह प्रावधान एनएफआरए के भीतरजांच व अनुशासनात्मक कार्रवाई के संबंध में एक डिवीजन बनाने के लिए है।

तेजी से विकसित हो रहे कॉर्पोरेट परिदृश्य और बदलती व्यावसायिक प्रथाओं के बीच नई अवधारणाओं को ध्यान में रखते हुए, विधेयक में कर्मचारी स्टॉक विकल्प योजनाओं के अतिरिक्त, कार्यकारी मुआवजे के लिए शेयर पूंजी के मूल्य से जुड़े नए प्रकार के साधनों जैसे प्रतिबंधित स्टॉक यूनिट्स (आरएसयू) और स्टॉक एप्रिसिएशन राइट्स (एसएआर) को मान्यता दी है।

 विधेयक में कंपनियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वार्षिक आम बैठकें (एजीएम) और असाधारण आम बैठकें (ईजीएम) करने की अनुमति देने का प्रस्ताव दिया है, बशर्ते कि निर्दिष्ट अवधि के भीतर कम से कम एक एजीएम (एजीएम) भौतिक रूप से आयोजित की जाए।  चार्टर्ड एकाउंटेंसी फर्मों के समान कंपनियों को वैधानिक समर्थन प्रदान करते हुए विधेयक में  उन फर्मों के गठन की अनुमति दी गई है, जिनमें अधिकांश सदस्य लागत लेखाकार या कंपनी सचिव हों। यह बहु विषयक फर्म बनाने में मदद करेगा जो गैर ऑडिट सेवाएं प्रदान करने में सक्षम होंगी। वित्तीय ऑडिट सेवाओं के लिए कानून के अनुसार फर्म के अधिकांश सदस्य चार्टर्ड एकाउंटेंट होने चाहिए।

किंग स्टब ऐंड कसिवा, एडवोकेट्स ऐंड अटॉर्नीज के पार्टनर अभिषेक पालीवाल ने कहा, ‘प्रस्तावित सुधारों का एक प्रमुख पहलू भारत के कॉर्पोरेट ढांचे का विकसित वैश्विक प्रथाओं के साथ तालमेल करने की कवायद है। यह विधेयक एक व्यापक नीतिगत बदलाव दिखाता है, जिसमें ज्यादा सुविधा देने वाला, आधुनिक और वैश्विक नियमों के अनुरूप कानून होगा।’ 

अधिनिर्णय में देरी के मसले के समाधान के लिए विधेयक में राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के विशेष पीठों के गठन का प्रस्ताव है ताकि कंपनी अधिनियम  और दिवाला और ऋणशोधन अक्षमता संहिता, 2016 के तहत विशिष्ट मामलों की सुनवाई की जा सके। विधेयक ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों (आईएफएससी) में काम करने वाली संस्थाओं को सुविधाजनक बनाने के लिए कई उपाय पेश किए हैं, जिसमें कंपनियों और एलएलपी (एलएलपी) को विदेशी मुद्राओं में काम करने की अनुमति देना और कुछ रिपोर्टिंग और शासन आवश्यकताओं को सरल बनाना शामिल है।

First Published : March 23, 2026 | 10:30 PM IST