अर्थव्यवस्था

Relief Package: पश्चिम एशिया संकट के बीच निर्यातकों को सरकार का बड़ा तोहफा

पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी ढुलाई और बीमा लागत के बीच सरकार ने निर्यातकों के लिए 497 करोड़ रुपये की राहत योजना शुरू की

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श्रेया नंदी   
Last Updated- March 20, 2026 | 8:39 AM IST

सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण व्यवधान झेल रहे भारतीय निर्यातकों को राहत देने के लिए 497 करोड़ रुपये की योजना पेश की है। गुरुवार को घोषित ‘रेजिलिएंस ऐंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन’ (रिलीफ) योजना का मकसद ऐसे निर्यातकों को सहायता देना है, जो माल ढुलाई में असाधारण बढ़ोतरी, बढ़े बीमा प्रीमियम और युद्ध से जुड़े निर्यात जोखिम से जूझ रहे हैं।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने इस योजना को समय से और लक्षित हस्तक्षेप करार दिया है और इसे निर्यात संवर्धन योजना (ईपीएम) के तहत पेश किया है। अमेरिका-इजरायल की ईरान के साथ चल रही जंग के कारण होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा संबंधी चिंता बढ़ी है। इसकी वजह से मालवाहक जहाजों के रास्ते बदलने, लंबी दूरी तय करने, ट्रांसशिपमेंट हब में कंजेशन और टकराव से जुड़े अधिभार की समस्या आई है। इससे न सिर्फ ढुलाई की लागत बढ़ी है, बल्कि इस मार्ग से परिचालन संबंधी अनिश्चितता आई है।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने संवाददाताओं से कहा, ‘पश्चिम एशिया में निर्यात करने वाले हमारे निर्यातकों को चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है। भेजा गया माल तय जगह पर नहीं पहुंच पाया है। निर्यातकों के बीच इसे लेकर चिंता है।’ बंदरगाहों और हवाईअड्डों पर खासकर खराब होने वाले सामान ज्यादा प्रभावित हुए हैं। एमएसएमई निर्यातक सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं, जिन्हें भुगतान में देरी, कार्यशील पूंजी के दबाव व लागत में बढ़ोतरी को ग्राहकों पर डाल देने की सीमित संभावनाओं से जूझना पड़ रहा है।

विदेश व्यापार महानिदेशक (डीजीएफटी) लव अग्रवाल ने कहा कि निर्यात को स्थिर बनाए रखने और इस संकट के समय में भारत की बाजार हिस्सेदारी की रक्षा के लिए समर्थन पैकेज की जरूरत थी। शिपिंग लाइन और बीमाकर्ताओं ने अतिरिक्त युद्ध जोखिम प्रीमियम लेना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2024 में लाल सागर संकट के दौरान कम समय में ही प्रमुख मार्गों से माल ढुलाई की दरों में करीब 90 से 100 प्रतिशत वृद्धि हो गई थी।

वाणिज्य मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, बंदरगाह एवं नौवहन, वित्तीय सेवा विभाग, विदेश मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक , सीबीआईसी आदि जैसे विभिन्न सरकारी विभागों को शामिल करते हुए एक अंतर-मंत्रालयी समूह (आईएमजी) का गठन किया गया है। यह माल ढुलाई की स्थिति के आधार पर विकसित हो रहे हालात का आकलन करने के लिए प्रतिदिन बैठक करेगा।

भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम (ईसीजीसी) को कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में नियुक्त किया गया है। यह योजना मुख्य रूप से उन खेप पर लागू होती है जिनकी आपूर्ति संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब, कुवैत, कतर, ओमान, बहरीन, इराक, ईरान, इजरायल और यमन जैसे देशों से होती है या जो वहां से होकर गुजरते हैं।

योजना के तीन प्रमुख हिस्से हैं। पहले हिस्से के तहत निर्यात दायित्व विस्तार शामिल है। अग्रिम अनुमति और ईपीसीजी अनुमति (जो एक मार्च से 31 मई, 2026 के बीच देय हैं) का स्वतः विस्तार 31 अगस्त, 2026 तक बिना किसी जुर्माने के किया जाएगा।

दूसरे हिस्से का उद्देश्य 16 मार्च से 15 जून तक की तीन महीने की अवधि में आगामी निर्यात खेपों के लिए ईसीजीसी ‘कवरेज’ को प्रोत्साहित करना व सुगम बनाना है। तीसरा घटक विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) को अधिभार के झटकों से बचाने के लिए बनाया गया है। यह 2014 फरवरी से 2015 मार्च तक एक महीने की अवधि में असाधारण माल ढुलाई और बीमा लागत की आंशिक प्रतिपूर्ति करता है। यह उन एमएसएमई निर्यातकों पर लागू होता है जिन्होंने ईसीजीसी ‘कवरेज’ नहीं लिया है।

First Published : March 20, 2026 | 8:39 AM IST