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उम्मीद से कम बढ़ी विकास दर

Last Updated- December 11, 2022 | 4:06 PM IST

भारत की अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 13.5 फीसदी बढ़ी। हालांकि कोविड-19 की वजह से आ​र्थिक गतिवि​धियों में कमी के कारण कम आधार प्रभाव के कारण वृद्धि ज्यादा दिख रही है। हालांकि सकल घरेलू उत्पाद  (जीडीपी) की वृद्धि दर पिछली चार तिमाहियों में सबसे अ​​धिक रही।
राष्ट्रीय सां​ख्यिकी कार्यालय की ओर से आज जारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-जून तिमाही में सेवा गतिवि​धियों में सुधार से आ​र्थिक वृद्धि बढ़ी है। दूसरी ओर व्यापार, होटल और परिवहन क्षेत्र की वृद्धि दर अभी भी महामारी के पूर्व स्तर (वित्त वर्ष 2020 की जून तिमाही) से कम है। हालांकि आतिथ्य क्षेत्र की गतिविधियों में तेजी आई है।
तिमाही आधार पर देखें तो चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी में 9.6 फीसदी का संकुचन आया है। हालांकि वित्त वर्ष 2020 की जून तिमाही की तुलना में यह महज 3.8 फीसदी बढ़ा है। 
​स्थिर कीमत पर अधारित सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में 12.7 फीसदी बढ़ा जबकि नॉमिनल जीडीपी में 26.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जो अर्थव्यवस्था में ऊंची मुद्रास्फीति के असर को दर्शाता है।
निजी खपत व्यय या निजी व्यय की वृद्धि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 25.9 फीसदी बढ़ी। पिछले समय में उपभोक्ताओं की टाली गई मांग आने से निजी व्यय में इजाफा हुआ है और इससे संकेत मिलता है कि उपभोक्ताओं में खर्च को लेकर आत्म​विश्वास बढ़ा है। हालांकि इस दौरान सरकारी खर्च महज 1.3 फीसदी बढ़ा, जो इस बात का संकेत है कि सरकार ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में अपने व्यय को नियंत्रण में रखा है।
अर्थव्यवस्था में निवेश मांग को दर्शाने वाला सकल ​​स्थिर पूंजी निर्माण में इस दौरान 20.1 फीसदी का इजाफा हुआ। हालांकि महामारी से पहले की अव​धि वित्त वर्ष 2020 की पहली तिमाही की तुलना में यह महज 6.7 फीसदी बढ़ा है।
आपूर्ति के स्तर पर विनिर्माण में निराशाजनक 4.8 फीसदी वृद्धि रही।  व्यापार, होटल, परिवहन सेवाओं में 25.7 फीसदी वृद्धि के बावजूद जीडीपी में सबसे अधिक योगदान देने वाला यह क्षेत्र वित्त वर्ष 2020 में महामारी से पहले के स्तर के मुकाबले 15.5 फीसदी नीचे है। श्रम की अत्यधिक मांग वाले निर्माण क्षेत्र की वृद्धि 16.8 फीसदी रही, जो महामारी से पहले के स्तर से मामूली ऊपर है। इसमें वृद्धि 1.2 फीसदी रही। 
नोमुरा में भारत के अर्थशास्त्री और उपाध्यक्ष अरुदीप नंदी ने कहा कि अगर हम निम्न आधार को हटा भी दें तो यह क्रमिक रुझान में शानदार बढ़ोतरी है। महामारी के बाद के कुछ मददगार कारकों से जून तिमाही में जीडीपी वृद्धि में इजाफा हुआ है। 
नंदी ने कहा, ‘हालांकि आगे इन मददगार कारकों की जगह चुनौतियां ले लेंगी क्योंकि साल आगे बढ़ने पर वैश्विक वृद्धि के बिगड़ते परिदृश्य, ऊंची महंगाई से उपभोग पर असर और धीरे-धीरे कड़ी होती वित्तीय स्थितियों से 
वृद्धि की रफ्तार पर असर पड़ना शुरू
हो जाएगा।’ एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज में प्रमुख अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने कहा कि आधार प्रभाव समाप्त होने और अर्थव्यवस्था में धीरे-धीरे सुस्ती आने से आगे वृद्धि के आंकड़ों में नरमी आएगी। हमारा अनुमान है कि इस साल वृद्धि 7 फीसदी रह सकती है। हालांकि इसमें गिरावट का जोखिम है। 
घरेलू आर्थिक गतिविधियों में व्यापक सुधार अभी नहीं आया है। ऐसे में आने वाले समय में ऊंची महंगाई, कॉरपोरेट लाभ में कमी, मांग को घटाने वाली मौद्रिक नीतियों और वैश्विक वृद्धि की मंद पड़ती संभावनाओं के रूप में वैश्विक चुनौतियों का वृद्धि परिदृश्य पर असर पड़ सकता है।

First Published - August 31, 2022 | 9:41 PM IST

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