वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की बैठक अब दिसंबर में होने की संभावना है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा कि इसमें ऑनलाइन गेमिंग पर कर, कुछ अपराधों को अपराधमुक्त करने और अपीली पंचाट स्थापित करने पर अंतिम फैसला हो सकता है।
अधिकारी ने कहा कि इन सभी 3 एजेंडा को जीएसटी परिषद की अगली बैठक में शामिल किए जाने की उम्मीद है, जो दिसंबर में हो सकती है। उन्होंने कहा कि पहले यह बैठक नवंबर में कराए जाने पर चर्चा चल रही थी, बहरहाल ऐसा लगता है कि बैठक अब राज्य विधानसभा के चुनावों के बाद दिसंबर में होगी।
हिमाचल प्रदेश और गुजरात दो प्रमुख राज्य हैं, जहां नवंबर और दिसंबर में चुनाव होने जा रहे हैं। इसके पहले परिषद की बैठक अगस्त में मदुरै में होने की उम्मीद की जा रही थी। यह जीएसटी परिषद की पहली बैठक होगी, जिसमें नए राजस्व सचिव संजय मल्होत्रा शामिल होंगे। मल्होत्रा 30 नवंबर को तरुण बजाज सेवानिवृत्त होने के बाद पदभार संभालेंगे। फैंटसी गेम पर कर लगाने के मसले पर मंत्रियों का एक अधिकार प्राप्त समूह विचार कर रहा है।
समूह ने इसके पहले की सिफारिश में 28 प्रतिशत सकल गेमिंग राजस्व (जीजीआर) के अलावा किसी उल्लेखनीय बदलाव का सुझाव नहीं दिया था। मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा की अध्यक्षता में बने मंत्रिसमूह ने अपनी पहली रिपोर्ट में सिफारिश की थी कि ऑनलाइन गेमिंग गतिविधियों पर पूरे मूल्य पर विचार कर उस पर सीधा 28 प्रतिशत कर लगाया जाए और कौशल के खेल और अवसर के खेल में कोई अंतर न किया जाए।
मामले से जुड़े एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘वही रुख बरकरार रख सकता है, क्योंकि भेद कर पाना जटिल होगा और इसकी व्याख्या में जटिलता आएगी।’ऑनलाइन गेमिंग के अलावा जीएसटी पंचाट और कुछ अपराधों को अपराधमुक्त करने पर भी परिषद की बैठक में रखा जा सकता है।
हरियाणा के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की अध्यक्षता में बनी एक और समिति जीएसटी पंचाट के मसले पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि अपील पंचाट गठित करने का ढांचा तैयार कर लिया गया है, जो जीएसटी संबंधी विवादों की सुनवाई करेगा। एक राज्य में इसका एक से ज्यादा पीठ बनाए जाने का प्रस्ताव है। यह समूह सदस्य नियुक्त करने के मानदंड में छूट का सुझाव दे सकता है। जीएसटी के मामले इस समय उच्च न्यायालय में जाते हैं, क्योंकि इसके लिए समर्पित पंचाट नहीं हैं। इसकी वजह से तमाम मामले लंबित हो गए हैं और देरी होती है।
अपराधमुक्त करने के मामले में राजस्व विभाग मामूली कर चोरी के मामलों में जेल की सजा खत्म करने और इसका निपटारा जुर्माने से करने पर विचार कर रहा है। विभाग जीएसटी व्यवस्था के तहत गैर संज्ञेय और जमानती अपराधों में गिरफ्तारी की सीमा को भी तर्कसंगत बनाने पर विचार कर रहा है।
सूत्रों का कहना है कि न्यूनतम एक साल की जेल की सजा के साथ जुर्माने को बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये तक किया जा सकता है, जो अभी 1 करोड़ रुपये है। प्रस्तावित कदमों को परिषद की बैठक के दौरान पेश किए जाने की उम्मीद है, जिसमें कंपाउंडिंग प्रावधानों को आसान बनाना भी शामिल है।