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सरकार जीएसटीआर-1 और जीएसटीआर-2बी से रिटर्न ऑटो पॉप्युलेट होने के बाद मासिक सारांश रिटर्न फॉर्म जीएसटीआर-3बी में संपादन की सुविधा बंद कर सकती है। इस कदम का मकसद डिफॉल्ट करने वाले आपूर्तिकर्ताओं पर कड़ी नज़र रखना और माल और सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था में में विसंगतियों को कम करना है। वित्त मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को यह जानकारी दी। जीएसटीआर-3बी एक मासिक सारांश कर रिटर्न है जिसके माध्यम से व्यवसाय कर देयता घोषित करते हैं और जीएसटी का भुगतान करते हैं। जीएसटीआर-1 बाहरी आपूर्ति या बिक्री की रिपोर्ट करने के लिए दाखिल किया जाता है, जबकि जीएसटीआर-2बी एक स्वचालित रूप से उत्पन्न विवरण है जो आपूर्तिकर्ताओं की फाइलिंग के आधार पर खरीदारों के लिए उपलब्ध इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) को दर्शाता है।
जीएसटीआर-3बी वर्तमान में जीएसटीआर-1 और जीएसटीआर-2बी में प्रदान किए गए विवरणों के आधार पर ऑटो-पॉप्युलेट किया जाता है। चूंकि इनवॉइस प्रबंधन प्रणाली (आईएमएस) वर्तमान में अनिवार्य नहीं है, इसलिए करदाताओं के पास रिटर्न दाखिल करने से पहले जीएसटीआर-3बी में ऑटो-पॉप्युलेटेड मानों को संपादित करने का विकल्प रहता है। अधिकारी ने कहा, ‘इसका मतलब है कि व्यवसायों को अंततः आपूर्तिकर्ताओं द्वारा अपलोड किए गए चालान के आधार पर रिटर्न दाखिल करना होगा, जिसमें मैनुअल परिवर्तनों का दायरा सीमित होगा।’
उन्होंने आगे कहा कि जीएसटी परिषद के समक्ष अनुमोदन के लिए रखे जाने से पहले इस प्रस्ताव की समीक्षा कानून समिति द्वारा की जाएगी। प्रेस के समय तक वित्त मंत्रालय को भेजे गए एक ईमेल का जवाब नहीं मिला।