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आईएमएफ ने वृद्धि अनुमान घटाया

Last Updated- December 11, 2022 | 1:51 PM IST

 अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष  (आईएमएफ) ने विश्व आ​र्थिक परिदृश्य की अपनी नई रिपोर्ट में आगाह किया है कि यूरोप में भू-राजनीतिक संकट, चीन में नरमी और वै​श्विक मुद्रास्फीति के मिले-जुले प्रभाव से अर्थव्यवस्था और भी लंबे समय तक चुनौतीपूर्ण बनी रह सकती है। आईएमएफ ने कहा कि ऊंची मुद्रास्फीति से रोजमर्रा के खर्च बढ़ने का संकट हो सकता है। 
आईएमएफ ने कैलेंडर वर्ष 2022 के लिए वै​श्विक वृद्धि परिदृश्य का अपना अनुमान बरकरार रखा है मगर वित्त वर्ष 2023 के भारत का वृद्धि का अनुमान 7.4 फीसदी से घटाकर 6.8 फीसदी कर दिया है। आईएमएफ ने कहा, ‘चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.8 फीसदी रहेगी, जो जुलाई के अनुमान से 0.6 फीसदी कम है। इससे पता चलता है कि दूसरी तिमाही में सुधार उम्मीद से कम रहा और बाहरी मांग में कमी ज्यादा रही।’
जिन देशों में वित्त वर्ष अप्रैल से मार्च के बीच चलता है, वहां आईएमएफ के 2022 का मतलब वित्त वर्ष 2023 है। बाकी के लिए यह कैलेंडर वर्ष 2022 ही है। जुलाई में अपनी विश्व आ​र्थिक परिदृश्य रिपोर्ट में आईएमएफ ने भारत के लिए चालू वित्त वर्ष का वृद्धि अनुमान 80 आधार अंक घटाकर 7.4 फीसदी कर दिया था।
अनुमान में ताजी कटौती के बाद आईएमएफ भी कई वैश्विक एजेंसियों में शामिल हो गया है, जिन्हें भारत के लिए 7 फीसदी से कम वृद्धि अनुमान नजर आ रहा है। मगर वित्त वर्ष 2024 के लिए उसने 6.1 फीसदी वृद्धि का अनुमान बरकरार रखा गया है।
आईएमएफ के आ​र्थिक सलाहकार पियरे-ऑलिवियर गौरिनचस ने कहा, ‘वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने कठिन चुनौतियां बनी रहेंगी। रूस-यूक्रेन युद्ध, मुद्रास्फीति में तेजी से कारण बढ़ते रोजमर्रा के खर्च और चीन में नरमी के देर तक नजर आते असर के कारण ऐसा होगा।’ उन्होंने कहा कि मौजूदा झटकों से ‘अर्थव्यवस्था के घाव’ फिर खुल जाएंगे, जो महामारी के बाद थोड़े ही भर पाए हैं।
आईएमएफ ने 2022 के लिए वै​श्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि का अनुमान 3.2 फीसदी पर बराकरार रखा मगर 2023 का अनुमान 20 आधार अंक घटाकर 2.9 फीसदी कर दिया।
गौरिनचस ने कहा, ‘एक तिहाई से अ​धिक वै​श्विक अर्थव्यवस्था 2023 में घट जाएगी और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं – अमेरिका, यूरोपीय संघ तथा चीन में वृद्धि सपाट ही रहेगी। संक्षेप में कहें तो बुरा दौर अभी आना बाकी है और कई लोगों के लिए 2023 मंदी की तरह होगा।’
आईएमएफ ने कहा कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक महंगाई पर लगाम कसने के लिए मौद्रिक नीतियों को सख्त बना रहे हैं मगर कम सख्ती और अधिक सख्ती के अपने खतरे हैं। ऐसे में दुनिया भर में मौद्रिक नीतियां तय करने वालों को सोच-समझकर सख्ती करनी चाहिए और महंगाई काबू में करने पर ही ध्यान देना चाहिए।
एजेंसी ने कहा, ‘वै​श्विक अर्थव्यवस्था के सामने झंझावात आ रहे हैं और वित्तीय संकट भी सामने आ सकता है। ऐसे में निवेशक अमेरिकी बॉन्ड जैसे सुरक्षित निवेश साधनों का सहारा ले सकते हैं और इससे डॉलर और भी मजबूत हो सकता है। इसलिए उभरते बाजारों के नीति निर्माताओं को जंग लड़नी होगी।’
 

First Published - October 11, 2022 | 10:01 PM IST

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