अर्थव्यवस्था

ईरान संघर्ष का असर, रुपया दबाव में; आरबीआई के लिए बढ़ी चुनौती

आरबीआई को रुपये की अस्थिरता को नियंत्रित करने और उधारी की लागत में तेज वृद्धि को रोकने के बीच संतुलन बनाने में चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

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अंजलि कुमारी   
Last Updated- March 16, 2026 | 8:46 AM IST

सरकारी बॉन्ड यील्ड निकट भविष्य में भले ही सीमित दायरे में रहें लेकिन रुपये पर दबाव बने रहने की संभावना है क्योंकि ईरान संघर्ष के कारण तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। इससे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को रुपये की अस्थिरता को नियंत्रित करने और उधारी की लागत में तेज वृद्धि को रोकने के बीच संतुलन बनाने में चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

घरेलू मुद्रा पहले ही कमजोर हो चुकी है क्योंकि संघर्ष का अब तीसरा हफ्ता शुरू हो चुका है। इस सप्ताह रुपया 91.71 प्रति डॉलर से लेकर 92.47 प्रति डॉलर के बीच उतार-चढ़ाव करता दिखा और 92.46 प्रति डॉलर पर बंद हुआ जो नया ऐतिहासिक निम्नतम स्तर है। यह पिछले हफ्ते के 91.75 प्रति डॉलर से भी कमजोर है और इसका कारण वैश्विक जोखिम में वृद्धि और तेल की कीमतों का बढ़ना है।

जब से संघर्ष शुरू हुआ है, कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 98.7 डॉलर प्रति बैरल हो गई है, खासतौर पर जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित करने की धमकी दी, जो वैश्विक तेल शिपमेंट के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। अमेरिका ने भी 13 मार्च को ईरान पर हमले तेज किए हैं।

आईएफए ग्लोबल के संस्थापक और सीईओ अभिषेक गोयनका ने कहा कि रुपया तब तक दबाव में रहेगा जब तक ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहेगा और आरबीआई के पास रुपया को गिरने देने के अलावा और कोई विकल्प नहीं होगा। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 6 मार्च को समाप्त हुए सप्ताह में 716.8 अरब डॉलर था।

First Published : March 16, 2026 | 8:46 AM IST