प्रवासी भारतीयों के जमा से धन की आवक अप्रैल-सितंबर 2022 के दौरान सुधरकर 2.78 अरब डॉलर हो गई है, जो अप्रैल-सितंबर 2021 में 1.74 अरब डॉलर थी। इससे ब्याज दर पर सीमा में छूट जैसी कवायदों के असर का पता चलता है।
बहरहाल एनआरआई जमा में वित्त वर्ष 23 की पहली छमाही में गिरावट का दौर जारी है। सितंबर 2022 में जमा घटकर 133.6 अरब डॉलर रह गया है, जो मार्च 2022 में 139 अरब डॉलर और एक साल पहले 141.55 अरब डॉलर था। रिजर्व बैंक के आंकड़ों से पता चलता है कि अगस्त 2022 के 134.68 अरब डॉलर की तुलना में भी इसमें गिरावट आई है।
भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन दिनेश खारा ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा कि जमा का प्रवाह बढ़ा है, वहीं जमा में से कुछ राशि का इस्तेमाल त्योहारी सीजन में खरीदारी के लिए हुई है, यह जमा घटने की एक प्रमुख वजह है।
जुलाई 2022 में भारतीय रिजर्व बैंक ने एनआरआई जमा खातों में नए धन का प्रवाह बढ़ाने की कवायद की थी। रिजर्व बैंक ने एफसीएनआर (बी) और एनआरई जमा में ब्याज दर की सीमा में छूट और 4 नवंबर 2022 तक बढ़े जमा पर नकद आरक्षित अनुपात और सांविधिक तरलता अनुपात (एसएलआर) बरकरार रखने से छूट दी थी।
भारतीय रिजर्व बैंक ने अर्थव्यवस्था पर अपनी रिपोर्ट में कहा है कि नीतिगत कदमों के कारण प्रवासी जमा खातों में शुद्ध प्रवाह वित्त वर्ष 2023 की दूसरी तिमाही में बढ़ा है। अगर आगे की स्थिति को देखें तो एनआरआई जमा का प्रवाह विकसित अर्थव्यवस्थाओं में मंदी की उम्मीद पर निर्भर है। ब्याज दर की आगे की कार्रवाई भी असर डालेगी।
विदेशी मुद्रा प्रवासी (एफसीएनआर) जमा का प्रवाह अप्रैल-सितंबर 2022 में 0.94 अरब डॉलर रहा है, जो अप्रैल सितंबर 2021 के दौरान 1.5 अरब डॉलर था।
विदेश धन भेजने में 50 प्रतिशत वृद्धि
भारतीय रिजर्व बैंक की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलएसआर) के तहत पिछले साल की समान अवधि की तुलना में चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-सितंबर के दौरान धनप्रेषण में 50 प्रतिशत वृद्धि हुई है।
रिजर्व बैंक के हाल के आंकड़ों के मुताबिक भारतीयों ने इस अवधि के दौरान 13.4 अरब डॉलर विदेश भेजे हैं, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 8.9 अरब डॉलर भेजे गए थे। वित्त वर्ष 23 की दूसरी तिमाही में धनप्रेषण 7.3 अरब डॉलर था, जबकि एक साल पहले यह 5.2 अरब डॉलर था।