अर्थव्यवस्था

पीएम मोदी की स्लोवाकिया यात्रा से भारत को क्या मिला? 14 समझौतों ने बढ़ाई चर्चा

रक्षा, डिजिटल तकनीक, एआई, श्रम और निवेश सहयोग पर सहमति; दोनों देशों ने व्यापार बढ़ाने पर दिया जोर

Published by
अर्चिस मोहन   
Last Updated- June 16, 2026 | 8:14 AM IST

भारत और स्लोवाकिया ने सोमवार को अपने रिश्तों को व्यापक साझेदारी के स्तर पर बढ़ाते हुए 14 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। राजधानी ब्राटिस्लावा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के बीच सोमवार को हुई बातचीत के बाद दोनों देश रक्षा विनिर्माण सहयोग को मजबूती देने, श्रम संबंधी प्रवासन और डिजिटल तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए।

मोदी और फिको ने द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने और स्वचालन, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य उन्नत विनिर्माण उद्योगों जैसे क्षेत्रों में दोतरफा निवेश बढ़ाने की बात कही। मोदी ने फिको के साथ संयुक्त प्रेस ब्रीफिंग में कहा, ‘हममें बहुत संभावनाएं हैं। हमारी आकांक्षाएं भी बहुत बड़ी हैं। स्वचालन, रेलवे और उन्नत विनिर्माण तथा पर्यावरण के अनुकूल तकनीक आदि ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें हमारी खास रुचि है।’

स्लोवाकिया के सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक 2024 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 1.3 अरब डॉलर रहा जो अब तक का उच्चतम स्तर है। 2025 में 28 फीसदी की वार्षिक वृद्धि के साथ दोनों देशों के बीच व्यापार और बढ़कर 1.8 अरब डॉलर हो गया। इस बीच भारत का निर्यात 1.52 अरब डॉलर का रहा। भारतीय और स्लोवाकिया की कंपनियों ने विनिर्माण के क्षेत्र में गठबंधन किया है।

खासतौर पर वाहन और रेलवे मालवाहक डिब्बों के निर्माण के क्षेत्र में। दोनों नेताओं ने स्लावकोव 3, वाइशेग्राद 4 (वी4) और थ्री सीज इनिशिएटिव जैसे क्षेत्रीय समूहों के साथ सहयोग के विकास का समर्थन करने पर सहमति व्यक्त की जो मध्य और पूर्वी यूरोप में परस्पर जुड़ी क्षेत्रीय सहयोग रूपरेखाएं हैं। थ्री सीज इनिशिएटिव को 2016 में शुरू किया गया था और वह बाल्टिक, एड्रियाटिक और काला सागर के बीच स्थित यूरोपीय संघ के 13 सदस्य देशों को एक साथ लाता है। जबकि स्लावकोव 3 में चेक गणराज्य, स्लोवाकिया और ऑस्ट्रिया शामिल हैं। वी4 की स्थापना 1991 में हुई थी। यह पोलैंड, चेक गणराज्य, हंगरी और स्लोवाकिया के मध्य यूरोपीय देशों का एक राजनीतिक गठबंधन है।

मोदी ने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत-स्लोवाकिया सहयोग के लिए प्रौद्योगिकी एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। उन्होंने कोसिसे तकनीकी विश्वविद्यालय में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस यानी एआई में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) की पहली चेयर की स्थापना का स्वागत किया।

मोदी ने कहा कि एआई का भविष्य केवल नवाचार नहीं है बल्कि इसे विश्वास, जिम्मेदारी और मानव गरिमा प भी आधारित होना चाहिए। मोदी ने अंतरिक्ष क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग की संभावनाओं का उल्लेख किया और कहा कि भारत ने 2017 में स्लोवाकिया का पहला उपग्रह अंतरिक्ष में भेजा था। उन्होंने कहा कि असैन्य परमाणु ऊर्जा में सहयोग दोनों देशों के लिए प्राथमिकता क्षेत्र है। उन्होंने रक्षा सहयोग पर समझौते जिसमें संयुक्त विकास और संयुक्त उत्पादन शामिल है को दोनों देशों के बीच रणनीतिक सम्मिलन का प्रमाण बताया।

फिको और मोदी ने भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते पर शीघ्र हस्ताक्षर और कार्यान्वयन का आह्वान किया। दोनों पक्षों ने भारत और स्लोवाकिया के बीच गतिशीलता में लगे कामकाजी पेशेवरों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सामाजिक सुरक्षा समझौते के शीघ्र निष्कर्ष की दिशा में काम करने पर भी सहमति व्यक्त की। उन्होंने स्लोवाकिया की मध्य यूरोपीय परिवहन केंद्र के रूप में स्थिति की संभावनाओं को नोट किया और 5जी उपयोग मामलों, 6जी मानकीकरण, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) और मशीन-से-मशीन अनुप्रयोगों सहित नई और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग का पता लगाने पर सहमति जताई। दोनों पक्षों ने नियमित वाणिज्य दूतावास परामर्श के लिए एक तंत्र स्थापित करने का भी निर्णय लिया।

बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि भारत-स्लोवाकिया ‘व्यापक साझेदारी’ का उद्देश्य ‘मौजूदा सहयोग तंत्र को मजबूत करना और सहयोग को गहरा करने के नए मार्ग तलाशना’है। स्लोवाकिया ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत की सदस्यता के प्रति अपने रचनात्मक दृष्टिकोण की नए सिरे से पुष्टि की। 1993 में चेकोस्लोवाकिया के विभाजन के बाद चेक गणराज्य और स्लोवाक गणराज्य बनने के बाद यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली स्लोवाकिया यात्रा है।

प्रधानमंत्री मोदी अगले तीन दिनों तक फ्रांस में रहेंगे जहां वे जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे और आयोजन में आए वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी करेंगे। इन नेताओं में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप भी शामिल भारत ने पहली बार 2003 में जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लिया था। उस समय तत्कालीन फ्रांसीसी राष्ट्रपति जैक्स शिरॉक ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया था।

First Published : June 16, 2026 | 8:14 AM IST