अर्थव्यवस्था

2047 तक ‘अमीर’ बन सकता है भारत? RBI डिप्टी गवर्नर का बड़ा दावा

आरबीआई की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने कहा कि भारत तेज आर्थिक वृद्धि और व्यापक आर्थिक स्थिरता के चरण में प्रवेश कर चुका है

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सुब्रत पांडा   
Last Updated- May 12, 2026 | 8:04 AM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने कहा कि अब यह बहस का विषय नहीं रह गया कि भारत समृद्ध होगा या नहीं बल्कि अहम सवाल यह है कि आर्थिक संपन्नता कितनी तेजी से, कितने व्यापक स्तर पर और कितनी बराबरी के साथ राज्यों और उनकी जनता के बीच साझा की जाएगी। डिप्टी गवर्नर गुप्ता ने सोमवार को कोलंबिया विश्वविद्यालय में ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि भारत में तीव्र विकास और व्यापक आर्थिक स्थिरता का एक सकारात्मक दौर शुरू हो गया है।

उन्होंने कहा,‘आर्थिक समृद्धि ही भारत की महत्त्वाकांक्षा और नियति है।’ उन्होंने यह भी कहा कि अगर पिछले दो दशकों की आर्थिक गति इसी तरह जारी रही तो वर्ष 2046-47 तक औसत राज्य प्रति व्यक्ति आय उच्च आय सीमा के करीब पहुंच सकती है।

गुप्ता ने इस बात का भी जिक्र किया कि भारत की आर्थिक वृद्धि दर 1980 के दशक में औसतन 5.7 प्रतिशत से बढ़कर 1990 के दशक में 5.8 प्रतिशत हो गई और फिर 2000 के दशक में बढ़कर 6.3 प्रतिशत, 2010 के दशक में 6.6 प्रतिशत और हाल के चार वर्षों में 7.7 प्रतिशत तक पहुंच गई। प्रति व्यक्ति आय में यह तेजी और भी अधिक स्पष्ट रूप से दिख रही है। वर्ष 1981 में यह लगभग 274 अमेरिकी डॉलर और 1991 में 306 अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2024 में लगभग 2700 अमेरिकी डॉलर हो गई है।

उन्होंने कहा,‘हालांकि, प्रति व्यक्ति आय शुरू में दोगुना होने में दो दशकों से अधिक का समय लग गया मगर बाद के दो दशकों में यह लगभग पांच गुना बढ़ गई है। यह आर्थिक विकास की गति में एक स्पष्ट संरचनात्मक बदलाव को दर्शाता है।’ उन्होंने कहा कि जनसंख्या वृद्धि में कमी भी प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी में योगदान दिया है।

उन्होंने कहा कि भारत की जनसंख्या वृद्धि, जो कभी वैश्विक औसत से काफी अधिक थी, में लगातार कमी आई है और लगभग 2014 से यह वैश्विक स्तर के करीब पहुंच गई है जिससे प्रति व्यक्ति आय में इजाफा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत की प्रति व्यक्ति आय 2025 में बढ़कर 2,818 डॉलर, 2026 में 3,051 डॉलर और 2030 में 4,346 डॉलर होने का अनुमान जताया है। गुप्ता ने कहा कि भारत की बेहतर होती व्यापक आर्थिक स्थिरता मुद्रास्फीति, चालू खाता संतुलन, राजकोषीय स्थिति, ऋण गुणवत्ता और वित्तीय क्षेत्र के स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में टिकाऊ और मजबूत परिणामों में परिलक्षित होती है। उन्होंने इसका श्रेय राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन ढांचा, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और 2016 में शुरू की गई मुद्रास्फीति-लक्ष्यीकरण व्यवस्था जैसे सुधारों को दिया।

डिप्टी गवर्नर ने कहा कि राज्यों की आर्थिक तरक्की भी खूब हुई है पिछले दो दशकों में प्रत्येक राज्य की प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में राज्यों की औसत प्रति व्यक्ति आय अमेरिकी डॉलर में लगभग पांच गुना और स्थिर रुपये में तीन गुना से अधिक बढ़ी है जो भारत की दीर्घकालिक आय वृद्धि की मजबूती और निरंतर गति को रेखांकित करती है।

उन्होंने कहा,‘हालांकि, आय वृद्धि की रफ्तार देश के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग रही है। कुछ राज्य पिछले दो दशकों में पांच से दस गुना अधिक समृद्ध हुए हैं जबकि अन्य राज्यों में लगभग तीन गुना की मामूली वृद्धि दर्ज की गई है।’ उन्होंने यह भी कहा कि अधिक समृद्ध राज्यों में प्रति व्यक्ति आय का स्तर अपेक्षाकृत कम समृद्ध राज्यों की तुलना में तेजी से बढ़ा है मगर हाल के वर्षों में अमीर और गरीब राज्यों के बीच विकास का अंतर कम हुआ है।

गुप्ता ने कहा,‘कुल मिलाकर पूर्व में संपन्न राज्यों का बेहतर प्रदर्शन न केवल उच्च आय वृद्धि बल्कि धीमी जनसंख्या वृद्धि के कारण भी रहा है। औसत आय स्तर से ऊपर के राज्यों में सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) की वृद्धि दर अधिक है और जनसंख्या वृद्धि दर धीमी है जिसके परिणामस्वरूप प्रति व्यक्ति आय में तेजी से वृद्धि हो रही है।’

हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि हाल के वर्षों (वर्ष 2011-12 से वर्ष 2023-24) में उन राज्यों में उपभोग तेजी से बढ़ रहा है जहां पहले यह कम रहा था। यह भारत के राज्यों में जीवन स्तर के वितरण में समानता की ओर एक महत्त्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है।

उन्होंने कहा,‘अगर आर्थिक वृद्धि की रफ्तार यूं ही कायम रही तो कई राज्य 2047 तक (समृद्धि के प्रचलित अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार) ‘अमीर’ बन जाएंगे या अमीर बनने के करीब पहुंच जाएंगे।’ गुप्ता के मुताबिक वर्ष 2047 तक पूर्ण आर्थिक संपन्नता हासिल करने के लिए मौजूदा आर्थिक वृद्धि दर बनाए रखने या उसे और तेज करने के लिए राज्यों के स्तर पर हमारे विकास ढांचों का विस्तार करना जरूरी होगा।

First Published : May 12, 2026 | 8:04 AM IST