प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
सरकार ने भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले चीन समेत अन्य देशों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर लगी रोक में आज ढील दे दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय किया गया। अब इन देशों के निवेशक स्वत: मार्ग के जरिये या सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना 10 फीसदी तक गैर-नियंत्रक हिस्सेदारी ले सकेंगे।
सरकार ने इस संबंध में 2020 के प्रेस नोट-3 में संशोधन किया है। इसके तहत निवेश प्रस्तावों खास तौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स कलपुर्जा, पूंजीगत वस्तुओं और सोलर सेल जैसे क्षेत्रों के निवेश प्रस्तावों को निपटाने के लिए 60 दिनों की निश्चित समयसीमा तय की गई है।
चीन सहित सीमावर्ती देशों के निवेश पर रोक लगाए जाने के छह साल बाद नियमों में ढील दी गई है। इनका मकसद चीन से विदेशी निवेश को बढ़ाना है ताकि भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखला के साथ जुड़ने और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने में मदद मिल सके। सरकार को उम्मीद है कि एफडीआई नीति में इन बदलावों से स्टार्टअप और डीप टेक कंपनियों के जरिये वैश्विक निवेश आकर्षित होगा और कुछ हद तक नियामकीय निगरानी भी बनी रहेगी।
अभी तक भारत के सीमावर्ती देशों चीन, भूटान, नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान, म्यांमार से आने वाले किसी भी निवेश प्रस्ताव के लिए पहले से सरकार की मंजूरी जरूरी थी। हालांकि भारत ने चीन से एफडीआई पर कभी प्रतिबंध नहीं लगाया था मगर अंतर-मंत्रालय समिति से मंजूरी की व्यवस्था लागू की थी जिसमें बहुत समय लगता था। इससे चीन की कंपनियां निवेश करने से हिचकती थीं।
प्रेस नोट 3 कहलाने वाले इस कदम से अप्रैल 2020 में घरेलू कंपनियों के जबरिया या मौकापरस्त अधिग्रहण पर रोक लगाने के लिए भारत के रुख में बदलाव किया गया था।
असल में कोविड महामारी के कारण कंपनियों पर वित्तीय दबाव को देखते हुए यह कदम उठाया गया था। हालांकि इस कदम का मुख्य मकसद गलवान सीमा पर तनाव के बीच चीन से होने वाले निवेश को रोकना था। 17 अप्रैल, 2020 से पहले चीन से निवेश बिना किसी सरकारी मंजूरी के हो सकता था। लेकिन प्रेस नोट 3 के लागू होने से वैश्विक प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल फंड सहित निवेश प्रवाह पर बुरा असर पड़ रहा था।
आधिकारिक बयान में कहा गया कि यह उम्मीद की जा रही है कि नए दिशानिर्देश भारत में व्यापार करने में स्पष्टता और सुगमता प्रदान करेंगे और निवेश को बढ़ावा देंगे। इससे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रवाह में वृद्धि, नई प्रौद्योगिकियों तक पहुंच, घरेलू मूल्यवर्धन, घरेलू कंपनियों के विस्तार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के साथ एकीकरण में योगदान मिलेगा। इससे भारत को निवेश और विनिर्माण का अड्डा बनने में मदद मिलेगी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जिन बदलावों को हरी झंडी दी है उनके अनुसार, लाभकारी स्वामित्व तय करने के लिए परिभाषा एवं मानदंडों को धन शोधन रोकथाम नियम, 2003 के अनुरूप किया जाएगा।
अगर चीन अथवा किसी अन्य सीमावर्ती देश के निवेशक की कंपनी में हिस्सेदारी 10 फीसदी के दायरे में है तो उसे निवेश करने की अनुमति होगी।
खेतान ऐंड कंपनी के पार्टनर अतुल पांडेय ने कहा कि प्रस्तावित बदलावों से प्रेस नोट 3 ढांचे के तहत लाभकारी स्वामित्व जांच में अधिक स्पष्टता आने की उम्मीद है।