प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
पश्चिम एशिया संकट का असर अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र पर पड़ने के बावजूद भारत में मौजूदा वित्त वर्ष (2026-27) और अगले वित्त वर्ष (2027-28) में बुनियादी ढांचे पर निवेश में 45 से 50 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है।
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने मंगलवार को बुनियादी ढांचा क्षेत्र पर अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि इससे वित्त वर्ष 2028 तक निवेश की कुल राशि बढ़कर 23 से 24 लाख करोड़ रुपये हो जाएगी। एजेंसी ने कहा कि सरकार की नीतियों से लगातार मिल रहे समर्थन और मजबूत बैलेंस शीट के कारण बुनियादी ढांचा क्षेत्र की कंपनियां हाल के वर्षों में हुई वृद्धि की गति बनाए रखने को लेकर मजबूत स्थिति में हैं।
बहरहाल इन्फ्रा सेक्टर के सामने कुछ जोखिम बना हुआ है। अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में पीपीए में देरी और पारेषण संबंधी बुनियादी ढांचे की कमी इस क्षेत्र के लिए बड़ा व्यवधान है। सड़क क्षेत्र में परियोजना आवंटित करने में देरी से परियोजनाओं को लागू करने की गति प्रभावित हो सकती है और परियोजनाओं का मुद्रीकरण उम्मीद से कम होने के कारण धन का व्यवधान आ सकता है।
आवासीय रियल एस्टेट क्षेत्र में मांग की तुलना में आपूर्ति अधिक हो सकती है। एआई अपनाने और भूराजनीतिक अनिश्चितता के कारण वाणिज्यिक रियल इसेटेट में पट्टे का काम सुस्त रहने का जोखिम है। पिछले कुछ वर्षों की सुस्ती के बाद सड़क क्षेत्र में परियोजना आवंटन के काम में धीरे धीरे सुधार आने की उम्मीद है। बजट में अच्छा-खासा आवंटन होने और सरकार द्वारा मंजूरी की प्रक्रियाओं में आने वाली रुकावटों को दूर करने के प्रयासों के कारण ऐसा होने की संभावना है।