प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
भारत में अक्षय ऊर्जा (Renewable energy) उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के अक्षय ऊर्जा उत्पादन में 20 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है, जबकि उत्पादन क्षमता करीब 85 फीसदी बढ़ गई। अक्षय ऊर्जा उत्पादन बढ़ोतरी के उलट कोयला और लिग्नाइट आधारित बिजली उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में 4.3 प्रतिशत की गिरावट आई है। यह जानकारी काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर के ग्रीन फाइनेंस सेंटर (सीईईडब्ल्यू-जीएफसी) के ‘मार्केट हैंडबुक’ के नए वार्षिक संस्करण में दी गई है।
अक्षय ऊर्जा उत्पादन में तेज बढ़त देखने को मिल रही है। सीईईडब्ल्यू-जीएफसी के हैंडबुक के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में 280721.3 मिलियन यूनिट अक्षय ऊर्जा का उत्पादन हुआ, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 232227.1 मिलियन यूनिट रहा। इस तरह वित्त वर्ष 2025-26 में अक्षय ऊर्जा उत्पादन करीब 20 फीसदी बढ़ गया।
सीईईडब्ल्यू-जीएफसी के हैंडबुक के अनुसार भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड स्तर पर 57.5 गीगावाट की शुद्ध बिजली उत्पादन क्षमता जोड़ा है, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 33.2 गीगावाट की बढ़ोतरी से काफी अधिक है। इस नई बिजली उत्पादन क्षमता में लगभग 54.6 गीगावाट (लगभग 95 प्रतिशत) हिस्सेदारी अक्षय ऊर्जा (बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट समेत) की है, जो वर्ष 2024-25 में जोड़ी गई उत्पादन क्षमता 29.52 गीगावाट से करीब 85 फीसदी अधिक है।
अक्षय ऊर्जा में 44.6 गीगावाट क्षमता के साथ सौर ऊर्जा (ग्रिड-स्केल और रूफटॉप) सर्वाधिक आगे रहा है। इसके बाद पवन ऊर्जा में 6.1 गीगावाट की बढ़ोतरी हुई है। भारत की कुल स्थापित बिजली क्षमता अब लगभग 533 गीगावाट पहुंच गई है, जिसमें अक्षय ऊर्जा (बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट समेत) का योगदान लगभग 52 प्रतिशत है।
सीईईडब्ल्यू-जीएफसी हैंडबुक के अनुसार मार्च 2026 तक भारत में लगभग 151 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता (बड़े हाइड्रो सहित, लेकिन रूफटॉप सोलर को छोड़कर) परियोजनाएं निर्माणाधीन है। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, हाइब्रिड और बड़ी हाइड्रो परियोजनाओं से क्रमश: 90 गीगावाट, 29 गीगावाट, 19 गीगावाट और 13 गीगावाट क्षमता आने की उम्मीद है। टेंडर घोषित करने के मामले में अक्षय ऊर्जा कार्यान्वयन एजेंसियों (आरईएआईए) ने 10.4 गीगावाट के टेंडर जारी किए हैं।
वहीं, आरईएआईए और राज्य एजेंसियों की नीलामी में कुल 14.25 गीगावाट क्षमता का आवंटन किया गया है। खास बात यह है कि नीलामी की गई कुल क्षमता में ‘इनोवेटिव फॉर्मेट’ (जैसे फर्म एंड डिस्पैचबल रिन्यूएबल एनर्जी, स्टोरेज के साथ सौर ऊर्जा, हाइब्रिड) की हिस्सेदारी 76 प्रतिशत रही।
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मार्केट हैंडबुक ने एनर्जी स्टोरेज के लिए वित्त वर्ष 2025-26 को एक निर्णायक मोड़ बताया है। इस दौरान 37 स्टोरेज टेंडर घोषित किए गए, जिनमें से 31 टेंडर ‘बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम’ (BESS) के लिए थे। यह भारत के स्वच्छ एनर्जी ट्रांजिशन (ऊर्जागत संक्रमण) में स्टोरेज की प्रमुख भूमिका दिखाता है। आंध्र प्रदेश के एपीट्रांसको (APTRANSCO) टेंडर ने दो घंटे के ‘बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम’ के लिए 1.23 रुपये प्रति यूनिट का सबसे कम टैरिफ स्थापित किया, जो पिछले वित्त वर्ष (2024-25) के बेंचमार्क से 33 प्रतिशत कम है।
सीईईडब्ल्यू-जीएफसी के निदेशक गगन सिद्धू ने कहा, ‘भारत का एनर्जी ट्रांजिशन लगातार रफ्तार पकड़ रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में शुद्ध क्षमता बढ़ोतरी में अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी लगभग 95 प्रतिशत रही और इसके उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई। सीईईडब्ल्यू-जीएफसी की मार्केट हैंडबुक बताती है कि हमनें 35 प्रतिशत मार्केट कंसंट्रेशन के साथ इस वर्ष एक बहुत ही प्रतिस्पर्धी बाजार देखा।
हालांकि, इस समय यह क्षेत्र एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तीन तिमाहियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 26 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। वैश्विक व्यवधानों को देखते हुए यह बेहद जरूरी हो जाता है कि हम अक्षय ऊर्जा लक्ष्यों को पाने के लिए अपने रास्ते पर डटे रहें।’
हैंडबुक में भारत की बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) की वित्तीय स्थिति में आए उल्लेखनीय सुधार को भी रेखांकित किया है। ‘लेट पेमेंट सरचार्ज’ (LPS) नियमों की सफलता के कारण बिजली उत्पादन कंपनियों का बकाया (Legacy Dues) जो जनवरी 2024 में 49,451 करोड़ रुपये था, फरवरी 2026 तक घटकर मात्र 4,109 करोड़ रुपये रह गया है। इसके अलावा, देशभर में अब तक लगभग 6.5 करोड़ स्मार्ट मीटर भी लगाए जा चुके हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 30-30 साल की चार समान किश्तों में 6.98 प्रतिशत की कूपन दर पर 20,000 करोड़ रुपये के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड जारी किए गए। वहीं, अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तीन तिमाहियों में कुल 2.5 अरब डॉलर का एफडीआई आया, जिसमें से 79 प्रतिशत निवेश अकेले सौर ऊर्जा क्षेत्र में गया।