अर्थव्यवस्था

ऊर्जा संकट के बीच भारत की कूटनीतिक दौड़ तेज

पश्चिम एशिया संकट के बीच तेल और गैस की आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए भारत के कूटनीतिक संपर्क तेज

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अर्चिस मोहन   
Last Updated- March 12, 2026 | 8:52 AM IST

ऊर्जा बाजार में व्यवधान के बीच अपनी ईंधन आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। विदेश मंत्री एस जयंशंकर ने बुधवार को रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और यूरोपीय संघ (ईयू) की विदेश नीति प्रमुख काया कल्लास से बात की। इससे पहले मंगलवार को उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर पश्चिम एशिया संकट और उसके दुष्परिणामों पर चर्चा की।

रूस के विदेश मंत्री के साथ बातचीत इसलिए महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि कुछ दिन पहले ही अमेरिका ने भारत को रूस से 30 दिन के लिए कच्चा तेल खरीदने की छूट दी है। जयशंकर ने पिछले कुछ दिनों में कई पश्चिम एशियाई देशों के विदेश मंत्रियों संपर्क साधा है। उन्होंने इन देशों की सरकारों से वहां रहने और काम करने वाले भारतीयों की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति सहित अन्य क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा की है।

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण होर्मुज स्ट्रेट में यातायात प्रभावित हुआ है, इससे भारत को ऊर्जा आपूर्ति में बाधा आई है। सोशल मीडिया पोस्ट में जयशंकर ने कहा कि रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ उनकी फोन पर अच्छी बातचीत हुई, जहां दोनों ने पश्चिम एशिया संघर्ष और संबंधित राजनयिक प्रयासों पर चर्चा की। जयशंकर ने कहा, ‘दोनों ने द्विपक्षीय सहयोग एजेंडे की भी समीक्षा की।’ विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने ईयू की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि कल्लास के साथ पश्चिम एशिया संघर्ष और उसके दुष्परिणामों पर सार्थक बातचीत की।

इससे पहले मंगलवार को जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची, जर्मन विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून से बात की। ईरान के विदेश मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी जयशंकर-अराघची बातचीत के विवरण के अनुसार, ईरानी विदेश मंत्री ने होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते कच्चे तेल और गैस की शिपिंग में आई बाधा के लिए सीधे तौर पर अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया।

इसमें कहा गया है कि अराघची ने जयशंकर को पिछले 11 दिनों में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ किए गए हमलों का विस्तृत विवरण साझा किया, जिसमें मिनाब में लड़कियों के स्कूल पर मिसाइल हमला और नागरिक ठिकानों पर बमबारी भी शामिल है। विवरण में कहा गया है कि उन्होंने ईरान की अखंडता की रक्षा के दृढ़ संकल्प पर जोर दिया।

ईरान के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है, ‘फारस की खाड़ी में शिपिंग सुरक्षा की रक्षा के लिए ईरान के सैद्धांतिक दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए ईरान के विदेश मंत्री ने याद दिलाया कि फारस की खाड़ी में शिपिंग के लिए उत्पन्न हुई बाधा अमेरिका की आक्रामक और अस्थिर करने वाली कार्रवाई का परिणाम है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस स्थिति के लिए अमेरिका को जवाबदेह ठहराना चाहिए।’

इस बयान में अमेरिका और इजरायल की आक्रामकता को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के मौलिक सिद्धांतों और नियमों का उल्लंघन बताया। इसमें कहा गया है कि सभी सरकारों की यह जिम्मेदारी है कि वे इस सैन्य आक्रामकता और खुलेआम कानून के उल्लंघन की निंदा करें।

First Published : March 12, 2026 | 8:52 AM IST