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भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 500 अरब डॉलर तक बढ़ाने के साझा लक्ष्य को हासिल करने में हाइड्रोकार्बन प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। यह जानकारी अमेरिका-भारत इंडिया बिजनेस काउंसिल (यूएसआईबीसी) और ग्रांट थॉर्नटन भारत की बुधवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
‘भारत-अमेरिका ऊर्जा साझेदारी को मजबूत करना : निवेश और सहयोग के जरिए हाइड्रोकार्बन के अवसरों को खोलना’ शीर्षक वाली यह रिपोर्ट बताती है कि कैसे दोनों देशों के बीच ऊर्जा संबंध व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदल रहे हैं। इसमें हाइड्रोकार्बन मूल्य श्रृंखला में व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचे और ऊर्जा सुरक्षा जैसे पहलू शामिल हैं।
ग्रांट थॉर्नटन ने बयान में कहा, ‘रिपोर्ट के नतीजे बताते हैं कि एलएनजी (लिक्विफाइड नैचुरल गैस), कच्चे तेल, एलपीजी (तरलीकृत पेट्रोलियम गैस), इथेन और प्रोपेन के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के बड़े अवसर हैं। इससे दोनों देशों के लिए निवेश के नए रास्ते खुलेंगे, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और आपूर्ति श्रृंखला अधिक मजबूत बनेगी।’
रिपोर्ट साझेदारी की पूरी क्षमता का लाभ उठाने के लिएतीन प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में कदम उठाने की सिफारिश करती है। ये क्षेत्र हैं : द्विपक्षीय हाइड्रोकार्बन व्यापार का दायरा व मूल्य बढ़ाना, दोनों देशों में ऊर्जा कंपनियों के लिए निवेश का भरोसेमंद व आकर्षक माहौल बनाना और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाना। रिपोर्ट भारत के हाइड्रोकार्बन इकोसिस्टम में अमेरिकी निवेश के अवसरों की पहचान करती है।