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भारतीय परिधान निर्यातकों को वित्त वर्ष 2025 में 9-11 प्रतिशत रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद: ICRA

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ICRA ने कहा कि मांग में सुधार के साथ उसे उम्मीद है कि FY25 और FY26 में पूंजीगत व्यय में वृद्धि होगी। यह कारोबार के 5-8% के दायरे में रह सकता है।

Last Updated- October 21, 2024 | 2:31 PM IST
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भारतीय परिधान निर्यातकों को वित्त वर्ष 2024-25 में नौ से 11 प्रतिशत की राजस्व वृद्धि दर्ज करने की उम्मीद है। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने सोमवार को यह बात कही।

इक्रा ने बयान में कहा कि भारतीय परिधान निर्यात की दीर्घकालिक, अनुकूल संभावनाएं हैं, जिसे अंतिम बाजारों में उत्पाद की बढ़ती स्वीकार्यता, उभरते उपभोक्ता रुझान और उत्पादन संबंधी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना, निर्यात प्रोत्साहन, ब्रिटेन तथा यूरोपीय संघ के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते आदि के रूप में सरकार से मिले प्रोत्साहन से मदद मिली है।

इसमें कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष में अपेक्षित वृद्धि वित्त वर्ष 2023-24 के कमजोर प्रदर्शन के बाद हुई है। गत वित्त वर्ष में उच्च खुदरा ‘इन्वेंट्री’, प्रमुख बाजारों से सुस्त मांग, लाल सागर संकट सहित आपूर्ति श्रृंखला के मुद्दों और पड़ोसी देशों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण निर्यात प्रभावित हुआ था।

इक्रा ने कहा कि मांग में सुधार के साथ उसे उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2024-25 और वित्त वर्ष 2025-26 में पूंजीगत व्यय में वृद्धि होगी। यह कारोबार के पांच से आठ प्रतिशत के दायरे में रह सकता है।

इक्रा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं सह-समूह प्रमुख (कॉर्पोरेट रेटिंग्स) श्रीकुमार कृष्णमूर्ति ने कहा, ‘‘वित्त वर्ष 2023-24 में मामूली (दो प्रतिशत की) गिरावट के बाद, भारतीय परिधान निर्यातकों को वित्त वर्ष 2024-25 में नौ से 11 प्रतिशत की राजस्व वृद्धि दर्ज करने का अनुमान है। यह विभिन्न ग्राहकों द्वारा अपनाई गई जोखिम-मुक्त करने की रणनीति तथा प्रमुख अंतिम बाजारों खासकर अमेरिका तथा यूरोपीय संघ क्षेत्रों में खुदरा ‘इन्वेंट्री’ की पुनःपूर्ति से लाभान्वित होगी।’’

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उन्होंने कहा कि फिर भी कमजोर व्यापक आर्थिक माहौल तथा भू-राजनीतिक मुद्दों के बीच कुछ प्रमुख बाजारों में मांग की अनिश्चितता से जुड़ी चुनौतियां कायम हैं। इक्रा ने कहा कि बांग्लादेश में हालिया भू-राजनीतिक तनाव के परिणामस्वरूप भारत सहित देश के बाहर क्षमता में वृद्धि हो सकती है।

रेटिंग एजेंसी ने कहा, फिर भी प्रतिस्पर्धी लागत पर श्रम की उपलब्धता एवं तरजीही शुल्क पहुंच और अमेरिका तथा यूरोपीय संघ को निर्यात पर अगले दो वर्षों के लिए सबसे कम ‘विकसित देश’ का दर्जा दिए जाने से बांग्लादेश को अधिकतर अन्य विकासशील देशों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बने रहने में मदद मिलेगी।

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First Published - October 21, 2024 | 2:31 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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