अर्थव्यवस्था

पश्चिम एशिया की जंग से भारतीय अर्थव्यवस्था पर संकट: क्या 7.4% की विकास दर हासिल कर पाएगा भारत?

पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और तेल की ऊंची कीमतों ने भारत की आर्थिक रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है, जिससे महंगाई और चालू खाता घाटा बढ़ने का बड़ा खतरा है

Published by
बीएस वेब टीम   
Last Updated- March 28, 2026 | 9:47 PM IST

भारत सरकार की मासिक आर्थिक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगले वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल से शुरू) में 7 से 7.4 प्रतिशत की अनुमानित विकास दर को खतरा है। इसकी मुख्य वजह है पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष, जिससे ऊर्जा की कीमतें बढ़ रही हैं और सप्लाई चेन बिगड़ रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, करीब एक महीने पहले अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया था। इसके बाद विश्व के 20 प्रतिशत तेल परिवहन वाले महत्वपूर्ण शिपिंग रूट पर असर पड़ा है। इससे न सिर्फ तेल और फ्रेट की लागत बढ़ गई है, बल्कि सप्लाई चेन भी प्रभावित हुई है। सरकार की समीक्षा में कहा गया है कि इससे भारत में महंगाई और विकास दोनों पर दबाव बढ़ सकता है।

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने लिखा है कि अप्रैल और शायद मई के हाई-फ्रीक्वेंसी डेटा से नए वित्त वर्ष की सच्ची तस्वीर साफ होगी। उन्होंने यह भी चेताया कि चालू वित्त वर्ष के अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 1.3 प्रतिशत तक पहुंच चुका करंट अकाउंट डेफिसिट अगले साल और ज्यादा बिगड़ सकता है।

Also Read: WTO में भारत का बड़ा कदम: डिजिटल ट्रेड पर टैरिफ न लगाने के मोरेटोरियम को दो साल के लिए दी मंजूरी

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि प्रभावित क्षेत्रों के सबसे कमजोर कारोबारियों और परिवारों को तुरंत लक्षित राहत देनी चाहिए। घरेलू मांग अभी तक काफी स्थिर बनी हुई है, लेकिन आयात पर निर्भर सेक्टरों में जोखिम बढ़ गया है।

मार्च में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर करीब 95 के आसपास पहुंच गया। इसकी वजह देश से पैसा बाहर जाना (capital outflow) और तेल-ऊर्जा महंगी होने से आयात खर्च बढ़ना रहा।

ऊर्जा की ऊंची कीमतें और सप्लाई में रुकावटें विकास के रास्ते में बड़ी चुनौती बन रही हैं, खासकर उन उद्योगों के लिए जो आयातित कच्चे माल पर निर्भर हैं।

(रॉयटर्स के इनपुट के साथ)

First Published : March 28, 2026 | 9:43 PM IST