अर्थव्यवस्था

तेल महंगा, रुपया दबाव में! ईरान युद्ध से भारत को कितना नुकसान?

पश्चिम एशिया संकट से भारत पर बढ़ा दबाव, तेल महंगा होने से महंगाई और चालू खाते के घाटे का खतरा

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देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- March 19, 2026 | 10:16 AM IST

Indian Economy: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध को लेकर नुवामा की रिपोर्ट में बड़ा आकलन सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, यह युद्ध ज्यादा समय तक नहीं चल पाएगा, क्योंकि अमेरिका की अपनी ताकत सीमित पड़ रही है। नुवामा का कहना है कि अमेरिका इस समय ‘पैसा, सामान और सैनिक’ यानी तीन बड़ी चुनौतियों से जूझ रहा है। बढ़ते कर्ज और खर्च के कारण उसकी आर्थिक ताकत पर दबाव है। साथ ही, रक्षा से जुड़े कई जरूरी सामान के लिए वह दूसरे देशों, खासकर चीन पर निर्भर है। दूसरी ओर, लंबे समय से चल रहे युद्धों के कारण अब अमेरिका में जमीन पर सैनिक भेजने की राजनीतिक इच्छा भी कमजोर हो गई है। ऐसे में बढ़ती लागत अमेरिका को युद्ध जल्दी खत्म करने की ओर धकेल सकती है।

Indian Economy: अगर युद्ध लंबा खिंचा तो क्या होगा?

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर यह युद्ध लंबा चलता है, तो इसका असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ेगा। इससे अमेरिका की वैश्विक ताकत कमजोर हो सकती है, जो अभी तक उसकी सेना और डॉलर पर टिकी हुई है। लंबे युद्ध से हथियारों और संसाधनों की कमी का दबाव बढ़ सकता है, जिससे अमेरिका की क्षमता और उसकी वैश्विक साख पर सवाल उठ सकते हैं। ऐसे हालात में दुनिया एक ध्रुवीय व्यवस्था से हटकर कई देशों के प्रभाव वाली व्यवस्था की ओर बढ़ सकती है। वैश्विक स्तर पर इसका असर आर्थिक सिस्टम पर भी पड़ेगा।

  • डॉलर की पकड़ कमजोर हो सकती है
  • देश ज्यादा आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ सकते हैं
  • बाजारों में सरकार का दखल बढ़ सकता है
  • रक्षा खर्च तेजी से बढ़ सकता है

छोटे समय में बड़ा खतरा: मंदी का जोखिम

नुवामा की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर यह युद्ध लंबा चलता है तो दुनिया में आर्थिक सुस्ती या मंदी का खतरा बढ़ सकता है। इसकी वजह तेल की सप्लाई में दिक्कत और कीमतों का तेजी से बढ़ना है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे तेल झटके पहले भी अर्थव्यवस्था (जैसे 1990 का गल्फ युद्ध) को नुकसान पहुंचा चुके हैं। अभी भी हालात वैसे ही बनते दिख रहे हैं। अमेरिका में लोग पहले से महंगाई, ऊंची ब्याज दर और कम बचत जैसी दिक्कतों से जूझ रहे हैं, ऐसे में उन पर इसका असर ज्यादा पड़ सकता है।

इसका असर वैश्विक बाजारों पर भी दिख सकता है, जहां शेयर और बॉन्ड दोनों पर दबाव बढ़ सकता है। अगर स्थिति और खराब होती है, तो केंद्रीय बैंकों को बीच में आकर कदम उठाने पड़ सकते हैं।

Indian Economy: भारत पर असर ज्यादा क्यों?

रिपोर्ट के मुताबिक, यह युद्ध भारत के लिए ज्यादा अहम है, क्योंकि भारत की बड़ी आर्थिक निर्भरता पश्चिम एशिया पर है।

पश्चिम एशिया से भारत को बड़ा आर्थिक फायदा मिलता है-

  • करीब 15 प्रतिशत निर्यात वहीं जाता है
  • करीब 40 प्रतिशत पैसा (रेमिटेंस) वहीं से आता है

अगर तेल महंगा होता है, तो भारत का आयात खर्च बढ़ेगा और चालू खाते का घाटा बढ़ सकता है। इससे रुपये और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा। साथ ही कंपनियों के मुनाफे पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, कुछ राहत के पहलू भी हैं। सेवा क्षेत्र से कमाई मजबूत है, बैंकों और कंपनियों की स्थिति ठीक है और महंगाई फिलहाल नियंत्रण में है। ऐसे में आरबीआई सही कदम उठाकर नुकसान को सीमित कर सकता है।

First Published : March 19, 2026 | 10:16 AM IST