प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी तनाव के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था लगातार अनिश्चितताओं के साए में है। इसका असर कमोडिटी मार्केट, ग्लोबल ट्रेड और सप्लाई चेन पर साफ देखा जा रहा है। लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मई बुलेटिन में छपे एक लेख के मुताबिक, इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए है। RBI ने इस बुलेटिन में दावा किया है कि तमाम बाहरी चुनौतियों के बाद भी घरेलू मांग के दम पर देश की आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों और वित्तीय उतार-चढ़ाव ने चिंताएं जरूर बढ़ा दी हैं।
मई बुलेटिन के ‘स्टेट ऑफ द इकॉनमी’ लेख के अनुसार, देश की घरेलू आर्थिक गतिविधियों ने अप्रैल महीने में शानदार जुझारूपन (Resilience) दिखाया है। इस दौरान देश के इंडस्ट्रियल और सर्विसेज सेक्टर के कई सेगमेंट में मजबूती देखी गई। खेती-किसानी की बात करें तो प्री-मानसून की अच्छी बारिश और जलाशयों में पानी के बेहतर स्तर की वजह से खरीफ या गर्मियों की फसलों की बुवाई काफी अच्छी रही है।
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लेकिन इस सकारात्मक पहलू के साथ ही महंगाई के मोर्चे पर थोड़ी चुनौती बढ़ी है। अप्रैल के महीने में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.5 फीसदी पर पहुंच गई। महंगाई में आई इस तेजी की मुख्य वजह खाने-पीने की चीजों के दाम यानी फूड इन्फ्लेशन रहा, जबकि कोर इन्फ्लेशन (जिसमें खाना और ईंधन शामिल नहीं होता) इस दौरान स्थिर बना रहा।
लेख में कहा गया है कि पश्चिम एशिया के संकट की वजह से वित्तीय स्थितियां, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और कैपिटल फ्लो (पूंजी का प्रवाह) जैसी चीजें भारत के बाहरी सेक्टर के आउटलुक के लिए लगातार चुनौती खड़ी कर रही हैं। सप्लाई साइड के इस दबाव के कारण आने वाले दिनों का परिदृश्य थोड़ा धुंधला जरूर हुआ है, लेकिन भारत इस मुश्किल दौर में भी एक मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिति में खड़ा है।
इस विदेशी दबाव से निपटने के लिए भारत के पास एक मजबूत सुरक्षा कवच भी तैयार है। देश का मजबूत सर्विसेज एक्सपोर्ट, पॉजिटिव नेट एफडीआई (FDI) फ्लो और विदेशी मुद्रा भंडार का बड़ा बफर भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने में मदद कर रहे हैं। इसके साथ ही सरकार और रिजर्व बैंक द्वारा समय-समय पर उठाए गए नीतिगत कदमों से भी अर्थव्यवस्था को सहारा मिल रहा है।