अर्थव्यवस्था

Rupee Fall: रुपया पहली बार 95.6 के पार, आखिर क्यों बढ़ गई बाजार में घबराहट?

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 95.63 तक पहुंच गया

Published by
एजेंसियां   
Last Updated- May 12, 2026 | 3:30 PM IST

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय बाजारों और रुपये पर भी साफ दिखने लगा है। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 35 पैसे टूटकर अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 95.63 पर पहुंच गया। इससे पहले सोमवार को भी रुपया 79 पैसे की बड़ी गिरावट के साथ 95.28 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

रुपये में यह कमजोरी ऐसे समय आई है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर रुपये और बाजार पर पड़ता है।

ट्रंप के बयान से बढ़ी बाजार की चिंता

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ सीजफायर अब ‘लाइफ सपोर्ट’ पर है और शांति समझौते की उम्मीद कमजोर पड़ती दिख रही है। ट्रंप ने ईरान के नए प्रस्ताव को ‘पूरी तरह अस्वीकार्य’ बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी दबाव में नहीं है और इस संघर्ष में ‘पूरी जीत’ चाहता है। ट्रंप के इस बयान के बाद बाजार में डर बढ़ गया कि अगर तनाव और बढ़ा तो वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल

तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड का दाम 0.85 प्रतिशत बढ़कर 105.10 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के ट्रेजरी हेड अनिल कुमार भंसाली के मुताबिक, बाजार को डर है कि अगर पश्चिम एशिया संकट लंबा चला तो तेल सप्लाई पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि निवेशकों में चिंता बढ़ी हुई है।

शेयर बाजार में भी बिकवाली

रुपये में गिरावट और तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखा। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 525 अंक टूटकर 75,489 पर आ गया, जबकि निफ्टी 164 अंक गिरकर 23,651 के आसपास कारोबार करता दिखा। विदेशी निवेशकों ने भी सोमवार को भारतीय शेयर बाजार से बड़ी बिकवाली की। एक्सचेंज डेटा के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs ने 8,437 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

Also Read | तेल संकट का बड़ा झटका! Moody’s ने घटाया भारत की ग्रोथ का अनुमान, 2026 में सिर्फ 6% विकास दर की उम्मीद

डॉलर इंडेक्स में भी मजबूती

इस बीच डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की ताकत को दिखाता है, 0.19 प्रतिशत बढ़कर 98.14 पर पहुंच गया। डॉलर मजबूत होने से भी रुपये पर दबाव बढ़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव जल्द कम नहीं हुआ और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो रुपये और भारतीय बाजारों पर दबाव बना रह सकता है। (पीटीआई के इनपुट के साथ)

First Published : May 12, 2026 | 2:59 PM IST