व्लादीवोस्तक में आज से 7वीं ईस्टर्न इकनॉमिक फोरम की बैठक शुरू हो रही है। रूस के अधिकारियों के साथ बैठक में भारत के अधिकारी तेल सम्पन्न साइबेरिया में देश की पहुंच के विस्तार पर ध्यान केंद्रित करेंगे। बैठक 4 दिन तक चलेगी। नई दिल्ली में अधिकारियों ने कहा कि दोनों पक्ष इस इलाके में संयुक्त रूप से तेल अन्वेषण की संभावना और चल रहे उन अपतटीय तेल और गैस क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा करेंगे, जिसमें से पश्चिमी कंपनियां निकलने की प्रक्रिया में हैं। रूस में भारत के राजदूत पवन कपूर अधिकारियों के स्तर की बातचीत का नेतृत्व करेंगे, जो 5 से 8 सितंबर तक होनी है।
भारत का मानना है कि खासकर फरवरी में शुरू हुए यूक्रेन युद्ध के बाद रूस के साथ निकट के संबंध के कारण वह अहम विदेशी साझेदार बनकर उभरा है। भारत ने रूस से कच्चे तेल के आयात का बचाव किया है। भारत ने वित्त वर्ष 2022-23 के पहले 3 महीने के दौरान रूस से 7.9 अरब डॉलर के तेल, क्रूड और रिफाइंड का आयात किया है, जबकि वित्त वर्ष 2021-22 में पूरे साल के दौरान 5.2 अरब डॉलर का आयात हुआ था।
अगस्त तक रूस भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता था और वह भारत की तेल की कुल जरूरतों का 18.2 प्रतिशत आपूर्ति करता था। भारत के आयात पोर्टफोलियो में यूराल ग्रेड क्रूड की तुलना में साइबेरिया का हिस्सा बढ़ रहा है। रूस के नेतृत्व में ईस्टर्न साइबेरिया पैसिफिक ओसन (ईएसपीओ) पाइपलाइन द्वारा आपूर्ति किए जाने वाले ईएसपीओ ब्लेंड का एशिया प्रशांत के बाजारों के लिए महत्त्व है और यूक्रेन युद्ध के बाद भारत और चीन में इसकी मांग बढ़ी है।