अर्थव्यवस्था

तेल और सोने ने बिगाड़ा भारत का हिसाब, एक महीने में 8 अरब डॉलर बढ़ा घाटा

कमजोर रुपया एक्सपोर्टर्स को दे सकता है राहत, लेकिन महंगा कच्चा तेल बना बड़ा खतरा

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- May 18, 2026 | 3:11 PM IST

अप्रैल 2026 में भारत का व्यापार घाटा अचानक काफी बढ़ गया। मार्च में जहां यह करीब 21 अरब डॉलर था, वहीं अप्रैल में बढ़कर 28 अरब डॉलर पहुंच गया। यानी सिर्फ एक महीने में करीब 8 अरब डॉलर का बड़ा उछाल देखने को मिला।

इसकी सबसे बड़ी वजह महंगा तेल, ज्यादा गोल्ड इम्पोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक्स सामान का बढ़ता आयात रहा। ब्रोकरेज फर्म नुवामा की रिपोर्ट के मुताबिक, तेल और सोने से जुड़ा घाटा अकेले करीब 2-2 अरब डॉलर बढ़ा है। लेकिन सबसे ज्यादा चिंता इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर ने बढ़ाई है। मोबाइल, चिप्स और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान के बढ़ते आयात की वजह से इलेक्ट्रॉनिक्स ट्रेड डेफिसिट रिकॉर्ड 7.6 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

इम्पोर्ट बिल तेजी से बढ़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स बना सबसे बड़ा सिरदर्द

प्रमुख इम्पोर्ट सेक्टर (अरब डॉलर में) अप्रैल-25 फरवरी-26 मार्च-26 अप्रैल-26 फरवरी-26 YoY % मार्च-26 YoY % अप्रैल-26 YoY %
पेट्रोलियम 20.7 13.0 12.2 18.6 9.1 -35.9 -10.0
इलेक्ट्रॉनिक्स 9.2 10.1 11.3 12.8 33.4 19.5 38.2
मशीनरी 4.7 5.3 5.7 5.3 23.5 21.9 13.9
केमिकल्स 4.8 3.6 3.5 4.1 0.8 -9.4 -13.1
फर्टिलाइजर 0.7 0.9 0.6 0.7 45.0 2.2 2.8
गोल्ड 3.1 7.4 3.1 5.6 218.6 -31.6 81.7
सिल्वर 0.2 1.7 0.6 0.4 285.2 416.7 157.2
अन्य इम्पोर्ट 22.1 21.7 22.7 24.4 7.3 5.0 10.3

Source: Ministry of Commerce, HDFC Bank

HDFC Bank की रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल में भारत का कुल इम्पोर्ट बिल बढ़कर 71.9 अरब डॉलर पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 10% ज्यादा है। मार्च में इम्पोर्ट घटा था, लेकिन अप्रैल में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। इसकी सबसे बड़ी वजह गोल्ड, इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी इम्पोर्ट में तेज बढ़ोतरी रही।

Nuvama की रिपोर्ट के मुताबिक कोर ट्रेड डेफिसिट यानी तेल और सोने को छोड़कर बाकी व्यापार घाटा मार्च के 9 अरब डॉलर से बढ़कर अप्रैल में 13 अरब डॉलर पहुंच गया। सबसे ज्यादा चिंता इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को लेकर दिखी। मोबाइल फोन, चिप्स और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान के आयात की वजह से इलेक्ट्रॉनिक्स ट्रेड डेफिसिट रिकॉर्ड 7.6 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

HDFC Bank ने भी कहा कि नॉन-ऑयल और नॉन-गोल्ड इम्पोर्ट में करीब 15% की बढ़ोतरी हुई, जिसमें लगभग 70% योगदान इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी का रहा। इससे साफ है कि भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके लिए आयात पर निर्भरता भी बढ़ती जा रही है।

गोल्ड इम्पोर्ट ने बिगाड़ा पूरा हिसाब

अप्रैल में सोना और चांदी का आयात सालाना आधार पर 82% बढ़ गया। HDFC Bank की रिपोर्ट के मुताबिक इसकी बड़ी वजह अक्षय तृतीया जैसे त्योहारों के दौरान बढ़ी खरीदारी और गोल्ड ETF में लगातार निवेश रहा। दिलचस्प बात यह है कि सोने की कीमतें काफी ऊंची होने के बावजूद मांग कमजोर नहीं पड़ी। यही वजह रही कि गोल्ड इम्पोर्ट बिल तेजी से बढ़ गया। बढ़ते बुलियन इम्पोर्ट को देखते हुए सरकार ने हाल ही में सोने और चांदी पर प्रभावी इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर 15% कर दी है। साथ ही सिल्वर बार्स को “रिस्ट्रिक्टेड” कैटेगरी में डाल दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक अगर गोल्ड इम्पोर्ट में करीब 20% की कमी आती है, तो चालू खाते के घाटे यानी CAD पर दबाव कुछ कम हो सकता है।

तेल महंगा, लेकिन भारत ने घटाया आयात

अप्रैल में भारत का ऑयल इम्पोर्ट बिल करीब 18.6 अरब डॉलर रहा। हालांकि कच्चे तेल की कीमतें 114 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रहीं, लेकिन इसके बावजूद भारत ने तेल आयात की मात्रा घटा दी। HDFC Bank की रिपोर्ट के मुताबिक इसकी बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) का बंद होना रही, जिससे सप्लाई पर असर पड़ा। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संकट के दौरान भारत ने रूस से ज्यादा तेल खरीदना शुरू किया। मार्च में रूसी तेल की खरीद बढ़ी थी और अप्रैल में भी यही ट्रेंड जारी रहने की संभावना है। हालांकि ऊंची तेल कीमतों का भारत को एक फायदा भी मिला। भारत का ऑयल एक्सपोर्ट 34% बढ़ गया। इसके चलते नेट ऑयल इम्पोर्ट बिल ज्यादा नहीं बढ़ा और करीब 9 अरब डॉलर पर कंट्रोल में रहा।

एक्सपोर्ट बढ़ा, लेकिन अंदरूनी तस्वीर अभी भी कमजोर

अप्रैल में भारत का कुल सामान निर्यात करीब 13.8% बढ़ा। इसमें सबसे बड़ा योगदान पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग सामान का रहा। Nuvama की रिपोर्ट के मुताबिक मार्च में जहां एक्सपोर्ट में गिरावट थी, वहीं अप्रैल में थोड़ी रिकवरी देखने को मिली। इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट मार्च के 1% से बढ़कर अप्रैल में 13% हो गया। इंजीनियरिंग सामान का निर्यात भी बढ़ा। लेकिन दोनों रिपोर्ट्स का कहना है कि ऊपर से आंकड़े अच्छे जरूर दिख रहे हैं, लेकिन असली मांग अभी भी बहुत मजबूत नहीं है। टेक्सटाइल और दूसरे लेबर-इंटेंसिव सेक्टर अभी भी दबाव में हैं। इन सेक्टरों में सुधार तो दिखा, लेकिन ग्रोथ अभी भी कमजोर बनी हुई है।

वेस्ट एशिया संकट ने बदल दिया भारत का ट्रेड रूट

HDFC Bank की रिपोर्ट में कहा गया है कि वेस्ट एशिया में जारी तनाव का असर भारत के व्यापार पर साफ दिख रहा है। UAE को भारत का एक्सपोर्ट 36% घट गया, जबकि सिंगापुर को एक्सपोर्ट 180% बढ़ गया। इससे संकेत मिलता है कि कई शिपमेंट अब दूसरे रास्तों से भेजे जा रहे हैं। वहीं UAE, कतर, कुवैत और इराक से भारत का इम्पोर्ट तेजी से गिरा, जबकि सऊदी अरब से आयात बढ़ गया। रिपोर्ट के मुताबिक कई भारतीय जहाज अब रेड सी और दूसरे रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

सर्विस सेक्टर ने दी थोड़ी राहत

जहां सामानों के व्यापार में घाटा बढ़ा, वहीं सर्विस एक्सपोर्ट ने भारत को थोड़ी राहत दी। अप्रैल में सर्विस एक्सपोर्ट 13.4% बढ़ा, जबकि सर्विस इम्पोर्ट घटा। इस वजह से कुल गुड्स और सर्विसेज डेफिसिट घटकर 7.8 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले साल इसी समय 11.2 अरब डॉलर था। यानी अगर सर्विस सेक्टर मजबूत नहीं रहता, तो भारत का कुल बाहरी घाटा और ज्यादा बढ़ सकता था।

आगे क्या है सबसे बड़ी चिंता?

दोनों रिपोर्ट्स का मानना है कि आने वाले महीनों में भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव बना रह सकता है।

इसके पीछे कई बड़ी वजहें हैं:

  • कच्चे तेल की ऊंची कीमतें
  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट
  • दुनिया भर में कमजोर मांग
  • सप्लाई चेन की दिक्कतें
  • बढ़ता इलेक्ट्रॉनिक्स और गोल्ड इम्पोर्ट

हालांकि रुपये की कमजोरी भारतीय एक्सपोर्टर्स को कुछ राहत दे सकती है। कमजोर रुपया भारतीय सामान को विदेशी बाजार में सस्ता बनाता है, जिससे एक्सपोर्ट बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके अलावा अगर गोल्ड इम्पोर्ट कम होता है और ऑयल एक्सपोर्ट मजबूत रहता है, तो चालू खाते के घाटे यानी CAD पर दबाव कुछ कम हो सकता है।

First Published : May 18, 2026 | 3:10 PM IST