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महंगाई 18 माह के निचले स्तर पर आई, संतोषजनक दायरे में दर बरकरार रहने की संभावना

Last Updated- May 12, 2023 | 10:18 PM IST
RBI's warning on food inflation pressure, caution necessary in monetary policy फूड इंफ्लेशन के दबाव पर RBI की चेतावनी, मौद्रिक नीति में सतर्कता जरूरी

लगभग सभी श्रे​णियों में कीमतों पर दबाव कम होने और उच्च आधार प्रभाव के कारण अप्रैल में खुदरा महंगाई दर घटकर 18 महीने के निचले स्तर पर रहा। मुद्रास्फीति में नरमी से केंद्रीय अैक को नीति दर वृद्धि पर रोक को बरकरार रखने में सहूलियत हो सकती है। इस बीच कारखानों के उत्पादन में तेज गिरावट आई है। कमजोर मांग के कारण मार्च में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि पांच महीने के निचले स्तर पर रही।

राष्ट्रीय सां​ख्यिकी कार्यालय द्वारा आज जारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल में खुदरा मुद्रास्फीति घटकर 4.7 फीसदी पर आ गई जो मार्च में 5.66 फीसदी पर थी। खाद्य पदार्थों, ईंधन, कपड़े और सेवाओं की कीमतों में नरमी से खुदरा मुद्रास्फीति लगातार दूसरे महीने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ऊपरी सहज दायरे में बनी हुई है। आरबीआई ने 2 फीसदी घट-बढ़ के साथ मुद्रास्फीति का लक्ष्य 4 फीसदी तय किया है।

हालांकि औद्योगिक उत्पादन (IIP) में गिरावट थोड़ी चिंताजनक है। मार्च में आईआईपी की वृद्धि घटकर 1.1 फीसदी रही जो फरवरी में 5.8 फीसदी थी। विनिर्माण (0.5 फीसदी) और बिजली (1.6 फीसदी गिरावट) क्षेत्र के कमजोर प्रदर्शन की वजह से आईआईपी में गिरावट आई है। वित्त वर्ष 2023 में आईआईपी वृद्धि 5.1 फीसदी रही, जो वित्त वर्ष 2022 में 11.4 फीसदी थी।

मुद्रास्फीति की बात करें तो अप्रैल में खाद्य मुद्रास्फीति 17 महीने के निचले स्तर 3.84 फीसदी पर रह गई जो मार्च में 4.79 फीसदी थी। मुख्य रूप से दालों, अंडे, दूध, फलों और खाद्य तेलों की कीमतों में नरमी से खाद्य मुद्रास्फीति में कमी आई है। हालांकि इस दौराना दालों और चीनी के दाम में बढ़ोतरी देखी गई। लेकिन स​ब्जियों और मांस व मछली के दाम में संकुचन रहा।

इक्रा (ICRA) की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि औसत से अधिक बारिश और अप्रैल में सामान्य से कम तापमान के कारण जल्दी खराब होने वाली चीजों, खास तौर पर स​ब्जियों के दाम में मौसमी बढ़ोतरी में देरी हुई।

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नायर ने कहा, ‘खाद्य मुद्रास्फीति मई में भी नरम बनी रह सकती है। मौसम विभाग के अनुसार अलनीनो का प्रभाव मॉनसून सीजन के उत्तरार्द्ध में दिख सकता है, ऐसे में खरीफ की बुआई पर असर नहीं पड़ेगा। लेकिन बाद में मॉनसूनी बारिश कम होने से खरीफ की पैदावार प्रभावित हो सकती है और रबी की बुआई पर भी असर पड़ सकता है। इससे खाद्य मुद्रास्फीति में इजाफा हो सकती है।’

कारखानों के उत्पादन की बात करें तो मार्च में प्राथमिक वस्तुओं के उत्पादन में 3.3 फीसदी, बुनियादी ढांचा वस्तुओं में 5.3 फीसदी की गिरावट आई है।​ लेकिन पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन 8.1 फीसदी बढ़ा है। कमजोर मांग के कारण कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के उत्पादन में लगातार चौथे महीने गिरावट दर्ज की गई।

मार्च में विनिर्माण क्षेत्र के 23 सेगमेंट में से 10 में वृद्धि दर्ज की गई जबकि अन्य के उत्पादन वृद्धि में गिरावट आई है।

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि मशीनरी और वाहन क्षेत्र का प्रदर्शन अच्छा रहा है लेकिन उपभोक्ता वस्तुएं और FMCG लगातार निराश कर रहा है।

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कोटक इंस्टीट्यूशनल इ​क्विटीज के वरिष्ठ अर्थशास्त्री शुभदीप र​क्षित ने कहा कि आरबीआई इन आंकड़ों को अनुकूल मान सकता है और जून में प्रस्तावित मौद्रिक नीति के दौरान दर वृद्धि पर विराम को बरकरार रख सकता है।

केयर रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने कहा कि RBI संभवत: 2023 में दर वृद्धि पर विराम को बनाए रख सकता है।

First Published - May 12, 2023 | 10:18 PM IST

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