अर्थव्यवस्था

चौथी तिमाही में निजी उपभोग की मांग पस्त, सरकारी खर्चों और पूंजीगत निवेश के भरोसे टिकी GDP

सकल जमा पूंजी निर्माण (GFCF) बढ़कर 8.2% हो गया है, जिसने अर्थव्यवस्था को संभाला है, लेकिन चौथी तिमाही में निजी उपभोग की मांग में गिरावट दर्ज की गई है

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अहोना मुखर्जी   
Last Updated- June 06, 2026 | 10:36 AM IST

वित्त वर्ष 2025-26 में निवेश की मांग ने गति पकड़ी और इस बीच सकल जमा पूंजी निर्माण (जीएफसीएफ) भी 2024-25 के 6.4 फीसदी से बढ़कर 8.2 फीसदी हो गया। यह जानकारी राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों से निकली। वित्त वर्ष 26 के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अस्थायी अनुमानों के अनुसार अर्थव्यवस्था में निवेश की मांग का प्रतिनिधित्व करने वाले जीएफसीएफ की जीडीपी में हिस्सेदारी 30 आधार अंक बढ़कर वित्त वर्ष 25 के 31.6 फीसदी की तुलना में 31.9 फीसदी हो गई। वास्तविक निजी अंतिम खपत व्यय (पीएफसीई) में भी इजाफा हुआ और वह वित्त वर्ष 25 के 5.8 फीसदी से बढ़कर वित्त वर्ष 26 में 7.7 फीसदी हो गई।

पीएफसीई जो अर्थव्यवस्था में उपभोग मांग को दर्शाता है, का हिस्सा नॉमिनल जीडीपी में 20 आधार अंक बढ़कर वित्त वर्ष 25 के 56.5 प्रतिशत से वित्त वर्ष 26 में 56.7 प्रतिशत हो गया।

भारत रेटिंग्स एंड रिसर्च के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र कुमार पंत ने कहा कि जीएफसीएफ ने वित्त वर्ष 26 में जीडीपी वृद्धि को आगे बढ़ाया। पंत ने बताया, ‘अस्थायी अनुमान (पीई) में उच्च वृद्धि का कारण स्थिर पूंजी निर्माण में तेज विस्तार था। यह 8.2 प्रतिशत बढ़ा, जबकि दूसरे अग्रिम अनुमान में यह 7.1 प्रतिशत था। दूसरी ओर सरकारी उपभोग निर्यात और आयात के अस्थायी अनुमान के अनुसार दूसरे अग्रिम अनुमान की तुलना में धीमी गति से बढ़ने का अनुमान है।’

यद्यपि सरकारी खर्च, जिसे सरकारी अंतिम उपभोग व्यय (जीएफसीई) द्वारा दर्शाया जाता है वह वित्त वर्ष 26 में घटकर 5.5 प्रतिशत रह गया जबकि पिछले वर्ष यह 6.5 प्रतिशत था।

नॉमिनल जीडीपी में जीएफसीई का हिस्सा स्थिर रहकर वित्त वर्ष 26 में 10.7 प्रतिशत पर बना रहा जो पिछले वर्ष के समान था। डेलॉइट की अर्थशास्त्री रुमकी मजूमदार ने कहा कि भारत की मजबूत घरेलू मांग और सरकार का सक्रिय हस्तक्षेप अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने में मदद कर सकता है। उन्होंने जोड़ा, ‘सरकार का अग्रिम पूंजीगत व्यय कार्यक्रम उस समय एक महत्वपूर्ण वृद्धि बफर प्रदान कर रहा है जब निजी निवेश की भावना सतर्क बनी हुई है।’

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि निवेश सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में अच्छी तरह फैला हुआ था। उन्होंने कहा, ‘पूंजी निर्माण दर, जो निवेश का संकेतक है, मामूली रूप से बढ़कर 31.9 प्रतिशत हो गई, जो दर्शाता है कि यह सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में अच्छी तरह फैली हुई थी।’

उन्होंने आगे कहा, ‘सकारात्मक पहलू यह था कि उपभोग और पूंजी निर्माण में स्थिर वृद्धि हुई जो एक तरह से सरकार द्वारा वर्ष के दौरान खर्च को बढ़ावा देने को सही ठहराती है।’

इसके अतिरिक्त, वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में उपभोग मांग में गिरावट देखी गई, जहां पीएफसीई वास्तविक रूप से तीसरी तिमाही के 8.2 प्रतिशत से घटकर 7.1 प्रतिशत हो गया। इस बीच निवेश मांग की वृद्धि तीसरी तिमाही के 8.2 प्रतिशत से बढ़कर चौथी तिमाही में 10.8 प्रतिशत हो गई। चौथी तिमाही में सरकारी व्यय 4.6 प्रतिशत से बढ़कर 4.9 प्रतिशत हो गया।

क्रिसिल लिमिटेड के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा कि मजबूत निजी उपभोग और स्थिर निवेश ने चौथी तिमाही के जीडीपी आंकड़ों को अपेक्षा से अधिक बढ़ा दिया।

First Published : June 6, 2026 | 10:36 AM IST