सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेवाओं का देश से सबसे अधिक निर्यात होता है और इससे भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा भी आती है। मगर देश के तेजी से बढ़ते व्यापार घाटे और चालू खाते के घाटे की भरपाई करने की उद्योग की क्षमता लगातार घट रही है। इस साल जुलाई में आईटी सेवाओं के शुद्ध निर्यात से देश के मासिक व्यापार घाटे की महज 30 फीसदी भरपाई हो सकी, जबकि पिछले साल जुलाई में इस क्षेत्र ने व्यापार घाटे की 68 फीसदी भरपाई कर दी थी। पिछले 10 साल में आईटी सेवाओं के शुद्ध निर्यात ने भारत के औसतन 57.5 फीसदी वस्तु व्यापार घाटे की भरपाई की है।
इस साल जुलाई में देश का शुद्ध आईटी सेवा निर्यात 9 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल जुलाई महीने के 7.5 अरब डॉलर से 20 फीसदी अधिक था। मगर इस बार जुलाई में वस्तु व्यापार घाटा 30 अरब डॉलर रहा, जो पिछले जुलाई के 11 अरब डॉलर से 173.4 फीसदी ज्यादा था।
कुल निर्यात में से कुल आयात घटाने पर शुद्ध निर्यात सामने आता है। जब आयात का मूल्य निर्यात के मूल्य से अधिक होता है तो देश को व्यापार घाटा होता है। भारत के वस्तु व्यापार में भी इसी तरह घाटा हो रहा है।व्यापार का ज्यादा स्पष्ट रुझान सालाना या पिछले 12 महीनों के आंकड़ों से सामने आता है। इस साल जुलाई में खत्म 12 महीने की मियाद में आईटी सेवाओं का शुद्ध निर्यात 101.1 अरब डॉलर रहा, जो जुलाई 2021 में समाप्त 12 महीनों के 92 अरब डॉलर से 9.9 फीसदी अधिक है। इसी अवधि में वस्तु व्यापार घाटा दोगुने से भी ज्यादा वृद्धि कर 258.7 अरब डॉलर हो गया, जो जुलाई, 2021 में समाप्त 12 महीनों की अवधि में 127 अरब डॉलर ही था। इसलिए इस साल जुलाई में समाप्त 12 महीनों के दौरान भारत के व्यापार घाटे की केवल 39.1 फीसदी भरपाई शुद्ध आईटी सेवा निर्यात से हुई, जबकि एक साल पहले भरपाई का आंकड़ा 72.3 फीसदी था।
आईटी सेवा निर्यात में सुस्त वृद्धि के कारण भारत को अपना व्यापार घाटा और चालू खाते का घाटा पाटने के लिए पूंजी की आवक और विदेश में बसे कामगारों से आने वाली रकम पर अधिक निर्भर रहना पड़ा है। इससे रुपये पर दबाव पड़ता है। सिस्टेमैटिक्स ग्रुप में रणनीति एवं शोध प्रमुख धनंजय सिन्हा ने कहा, ‘भारत का घाटा आईटी सेवा निर्यात के मुकाबले तेजी से बढ़ रहा है। इससे हाल के वर्षों में चालू खाते का घाटा पाटने के लिए पूंजी की आवक पर हमारी निर्भरता बढ़ी है। ऐसे में वैश्विक पूंजी आवक में बदलाव आने पर अर्थव्यवस्था को ठेस पहुंचती है, जैसा इस साल दिख भी रहा है।’ अन्य जानकार कच्चे तेल की ऊंची कीमतों पर इसका ठीकरा फोड़ते हैं, जिसकी भारत में होने वाले आयात में सबसे बड़ी हिस्सेदारी है। एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज के विश्लेषकों ने लिखा है, ‘आयात और निर्यात का अनुपात और बिगड़ने के आसार हैं। तेल कीमतों के झटके का असर कोयले, प्राकृतिक गैस, खाद्य तेल और सोने की कीमतों में बढ़ोतरी से गहरा जाएगा।’
विदेशी व्यापार के हाल के रुझान बताते है कि देश का व्यापार और चालू खाते का घाटा पाटने की आईटी क्षेत्र की कुव्वत और भी कम होती जाएगी। वित्त वर्ष 2023 में वस्तु निर्यात में तेजी से गिरावट आई है और आईटी सेवाओं का आयात उनके निर्यात के मुकाबले बढ़ रहा है। चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में वस्तु व्यापार पिछले साल अप्रैल-जुलाई के मुकाबले 18.5 फीसदी बढ़ा है, जबकि पिछली बार इसमें 41.7 फीसदी वृद्धि हुई थी। इसके मुकाबले इस बार अप्रैल-जुलाई में आयात केवल 48.3 फीसदी घटा, जो पिछली बार 56.37 फीसदी घटा था। इसीलिए इस साल अप्रैल से जुलाई के बीच वस्तु व्यापार घाटा बढ़कर 101 अरब डॉलर पर पहुंच गया।