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सस्ते ट्रैक्टरों की मांग से मार्जिन घटा

Last Updated- December 11, 2022 | 4:42 PM IST

किसानों के बीच सस्ते, कम हॉर्सपावर (एचपी) ट्रैक्टर मॉडलों की लोकप्रियता बढ़ने से जून तिमाही में अ​धिकतर ट्रैक्टर विनिर्माताओं के मार्जिन को झटका लगा। तिमाही के दौरान मात्रात्मक बिक्री रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बावजूद मार्जिन में गिरावट दर्ज की गई।
उद्योग प्रतिभागियों का कहना है कि महंगाई के रुख में नरमी के आसार फिलहाल नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में आगामी तिमाहियों के दौरान सस्ते ट्रैक्टरों की मांग बरकरार रहने की उम्मीद है। सोनालिका ट्रैकटर्स के संयुक्त प्रबंध निदेशक रमन मित्तल ने कहा कि वास्तव में ट्रैक्टरों के लिए उत्सर्जन मानदंड- ट्रेम 4 के अक्टूबर से प्रभावी होने के बाद सस्ते ट्रैक्टरों की मांग में कहीं अ​धिक तेजी दिख सकती है।
मित्तल ने कहा, ‘नए नियमों के साथ ट्रैक्टर बाजार सीआरडीआई प्रौद्योगिकी की ओर रुख करेगा जिससे ट्रैक्टर 1 से 1.5 लाख रुपये महंगा हो जाएगा।’ उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह हुआ कि कीमत में 20 से 25 फीसदी की वृद्धि होगी। बढ़ी हुई यही लागत चौथी तिमाही में 50 एचपी से अ​धिक क्षमता वाले ट्रैक्टरों की मांग को प्रभावित करेगी। बाजार में 50 एचपी वाले ट्रैक्टर का औसत परिचालन मूल्य 7.5 लाख है। इनपुट लागत बढ़ने और ट्रैक्टरों की कीमतों में हो रही लगातार वृद्धि से कृ​षि लाभप्रदता पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में किसानों का रुख कम एचपी क्षमता वाले सस्ते ट्रैक्टर मॉडलों की ओर दिख रहा है।
एस्कॉर्ट्स कुबोटा के कृ​षि मशीनरी कारोबार का एबिटा मार्जिन सालाना आधार पर 490 आधार अंक घटकर 10.6 फीसदी रहा गया। बाजार की अग्रणी कंपनी महिंद्रा ऐंड महिंद्रा के एबिटा मार्जिन में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। जून तिमाही में महिंद्रा ऐंड महिंद्रा का एबिटा मार्जिन 428 आधार अंकों की गिरावट के साथ 16 फीसदी रह गया। ताफे, सोनालिका, जॉन डीयरे आदि निजी ट्रैक्टर कंपनियां अपने वित्तीय नतीजों का खुलासा नहीं करती हैं।
एस्कॉर्ट्स कुबोटा के ग्रुप सीएफओ और कॉरपोरेट प्रमुख भारत मदान ने कहा कि पिछले 18 महीनों के दौरान कंपनी ने छह बार कीमतें बढ़ाई हैं। उन्होंने कहा, ‘इससे मांग पर दबाव काफी बढ़ गया है और किसान कम एचपी वाले ट्रैक्टरों को खरीदने के लिए मजबूर हैं।’
महिंद्रा ऐंड महिंद्रा के कार्यकारी निदेशक (फार्म उपकरण एवं ऑटोमोटिव) राजेश जेजुरिकर ने कहा कि जिंस कीमतों में तेजी के साथ-साथ बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों के कंधों पर सरकाने में कंपनी की असमर्थता के कारण भी मार्जिन में गिरावट आई है।

First Published - August 11, 2022 | 11:39 AM IST

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