Middle East Tensions और अनिश्चित हालात का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। बातचीत के दौर बार बार रुकने और फिर शुरू होने से बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। इससे निवेशकों में डर और अनिश्चितता बढ़ी है, जिसका असर पूंजी के फ्लो और अलग अलग एसेट क्लास पर पड़ रहा है। साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टेक्नोलॉजी में तेजी ने बाजार में एक अलग तरह का उत्साह भी पैदा किया है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर पर्शियन गल्फ क्षेत्र पर पड़ा है, जहां कई बड़े उत्पादन केंद्र नष्ट हो गए हैं। यह इलाका दुनिया के बड़े गैस भंडारों में से एक है, जहां से हीलियम, मीथेन और एलएनजी जैसी अहम गैसें निकलती हैं। इनका इस्तेमाल चिप्स बनाने से लेकर उर्वरक और ईंधन तक कई उद्योगों में होता है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन क्षमताओं को दोबारा खड़ा करने में कितना समय लगेगा, क्योंकि इसके लिए जरूरी उपकरण बहुत सीमित कंपनियां ही बनाती हैं और उनकी सप्लाई में सालों लग सकते हैं।
एलएनजी प्लांट और गैस प्रोसेसिंग के लिए जरूरी मशीनें जैसे हीट एक्सचेंजर और गैस टरबाइन की सप्लाई पहले से ही सीमित है। सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर की बढ़ती मांग के चलते इनकी उपलब्धता और भी मुश्किल हो सकती है। ऐसे में उत्पादन क्षमता बहाल करना आसान नहीं होगा, लेकिन बाजार अभी इस जोखिम को पूरी तरह नजरअंदाज कर रहा है।
| देश | 2026 वृद्धि दर (अप्रैल) | 2026 वृद्धि दर (जनवरी) | कॉमेंट |
|---|---|---|---|
| अमेरिका | 2.3 | 2.4 | आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से सपोर्ट, लेकिन रफ्तार थोड़ी धीमी |
| यूरो क्षेत्र | 1.1 | 1.3 | ऊर्जा झटकों से अभी सुस्ती, बाद में धीरे सुधार |
| जापान | 0.7 | 0.7 | सरकारी खर्च से कुछ राहत |
| चीन | 4.4 | 4.5 | निर्यात मजबूत, लेकिन प्रॉपर्टी सेक्टर की कमजोरी असर डाल रही |
| भारत | 6.5 | 6.4 | ऊर्जा पर निर्भरता से थोड़ी रफ्तार प्रभावित |
| रूस | 1.1 | 0.8 | ग्रोथ धीमी, लेकिन ऊंची ऊर्जा कीमतों से सहारा |
| ब्राजील | 1.9 | 1.6 | नीतिगत अनिश्चितता और महंगे इनपुट का असर |
| दुनिया | 3.1 | 3.3 | मिडिल ईस्ट युद्ध, महंगाई और सख्त वित्तीय हालात से दबाव |
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF ने 2026 के लिए वैश्विक वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 3.1 प्रतिशत कर दिया है। इसका कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और सप्लाई चेन में बाधाएं हैं। ज्यादातर बड़े देशों में वृद्धि दर धीमी पड़ने का अनुमान है।
इस चुनौतीपूर्ण माहौल में भारत अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की आर्थिक वृद्धि 2026-27 में करीब 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो वैश्विक औसत से बेहतर है। मजबूत घरेलू मांग, स्थिर बैंकिंग सेक्टर और नियंत्रित महंगाई इसके प्रमुख कारण हैं। हालांकि, चालू खाते और रुपये को स्थिर रखने के लिए नीतिगत कदम उठाने की जरूरत बताई गई है।
दुनिया भर के केंद्रीय बैंक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। 2025 में ब्याज दरों में कटौती के बाद 2026 में ज्यादातर देशों के केंद्रीय बैंकों ने दरों को स्थिर रखा है और अब वे हालात साफ होने का इंतजार कर रहे हैं।
| देश | वर्तमान ब्याज दर | पिछली नीति में बदलाव | ताजा महंगाई | 2026 महंगाई लक्ष्य |
|---|---|---|---|---|
| ब्राजील | 14.8 | -0.25 | 4.14 | 3% |
| रूस | 15.0 | -0.5 | 5.9 | 4.5% से 5.5% |
| जापान | 0.8 | स्थिर | 1.3 | 2.00% |
| वियतनाम | 4.5 | स्थिर | 4.65 | 4.50% |
| मलेशिया | 2.8 | स्थिर | 1.4 | 1.5% से 2.5% |
| चीन | 3.0 | स्थिर | 1 | 2% |
| भारत | 5.3 | स्थिर | 3.4 | 4% प्लस माइनस 2% ( यानी कम से कम: 2% ज्यादा से ज्यादा: 6%) |
| दक्षिण कोरिया | 2.5 | स्थिर | 2.2 | 2.00% |
| थाईलैंड | 1.0 | स्थिर | -0.08 | 1% से 3% |
| दक्षिण अफ्रीका | 6.8 | स्थिर | 3 | 3.00% |
| स्विट्जरलैंड | 0.0 | स्थिर | 0.3 | 0% से 2% |
| यूनाइटेड किंगडम | 3.8 | स्थिर | 3 | 2% |
| अमेरिका | 3.8 | स्थिर | 3.3 | 3% |
| इंडोनेशिया | 4.8 | स्थिर | 3.48 | 2.5% प्लस माइनस 1% (यानी कम से कम: 1.5% ज्यादा से ज्यादा: 3.5%) |
| फिलीपींस | 4.3 | स्थिर | 4.1 | 2% से 4% |
| यूरोपीय संघ | 2.2 | स्थिर | 2.1 | 2% |
| मेक्सिको | 6.8 | -25 | 4. | 3% |
पश्चिम एशिया में अगर शांति की कोई कोशिश आगे बढ़ती है, तो उसके असर को देखते हुए आगे की रणनीति तय की जाएगी। भारत में भी महंगाई और वृद्धि के बीच संतुलन की चुनौती बनी हुई है, ऐसे में रिजर्व बैंक के लिए तुरंत दरों में बदलाव की गुंजाइश कम नजर आती है और फिलहाल ब्याज दरें लंबे समय तक स्थिर रह सकती हैं।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब साफ नजर आने लगा है। दुबई और अबू धाबी जैसे बड़े फाइनेंशियल हब के आसपास अनिश्चितता बढ़ रही है, जिससे निवेशक अपना पैसा ज्यादा सुरक्षित जगहों पर ले जाने की सोच रहे हैं। ऐसे में भारत की गिफ्ट सिटी उनके लिए एक नया विकल्प बन सकती है। दूसरी तरफ, मिडिल ईस्ट के ऊपर से जाने वाली फ्लाइट्स पर भी असर पड़ सकता है, जिससे एयरलाइंस नए रास्ते तलाशेंगी और भारत के शहर ट्रांजिट हब के तौर पर उभर सकते हैं। हालांकि, इसका फायदा उठाने के लिए भारत को अपने एयरपोर्ट और सुविधाओं को और बेहतर बनाना होगा।
रिपोर्ट के अनुसार, सप्लाई बाधाओं के चलते कच्चे तेल की कीमतें फिलहाल करीब 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रह सकती हैं। युद्ध खत्म होने के बाद भी सप्लाई सामान्य होने में समय लगेगा। वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों ने फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव को रोक रखा है। भारतीय रिजर्व बैंक भी फिलहाल दरों में कोई बदलाव नहीं कर सकता है और स्थिति स्पष्ट होने तक यथास्थिति बनाए रख सकता है।
| कैटेगरी | 2024 | 2025 | बदलाव |
|---|---|---|---|
| एफडीआई | 1.4 ट्रिलियन डॉलर | 1.6 ट्रिलियन डॉलर | +14% |
| क्रॉस बॉर्डर एम एंड ए | 0.45 ट्रिलियन डॉलर | 0.40 ट्रिलियन डॉलर | -10% |
| ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स | 1.3 ट्रिलियन डॉलर | 1.3 ट्रिलियन डॉलर | 0% |
| अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट फाइनेंस | 1.1 ट्रिलियन डॉलर | 0.9 ट्रिलियन डॉलर | -16% |
2025 में दुनिया भर में निवेश का ट्रेंड थोड़ा मिला जुला नजर आ रहा है। एक तरफ कुल एफडीआई करीब 14 प्रतिशत बढ़ा है, क्योंकि कंपनियां डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रक्षा जैसे सेक्टर में ज्यादा पैसा लगा रही हैं। लेकिन दूसरी तरफ, बड़ी डील्स जैसे कंपनियों के मर्जर और अधिग्रहण कम हुए हैं और बड़े प्रोजेक्ट्स में निवेश भी घटा है। इससे लगता है कि निवेशक अभी लंबी अवधि के बड़े जोखिम लेने से बच रहे हैं। साथ ही, अमीर देशों में निवेश तेजी से बढ़ा है, जबकि मिडिल और गरीब देशों में पैसा आने की रफ्तार अभी भी धीमी बनी हुई है।
| श्रेणी | 2024 | 2025 | बदलाव |
|---|---|---|---|
| विकसित देश | 0.5 ट्रिलियन डॉलर | 0.7 ट्रिलियन डॉलर | +43% |
| विकासशील देश | 0.9 ट्रिलियन डॉलर | 0.85 ट्रिलियन डॉलर | -7% |
| उच्च आय वाले देश | 0.9 ट्रिलियन डॉलर | 1.1 ट्रिलियन डॉलर | +22% |
| मध्यम आय वाले देश | 0.35 ट्रिलियन डॉलर | 0.37 ट्रिलियन डॉलर | +4% |
| निम्न आय वाले देश | 0.20 ट्रिलियन डॉलर | 0.19 ट्रिलियन डॉलर | -5% |
डिस्क्लेमर: ऊपर बताए गए डेटा SBI रिसर्च रिपोर्ट से लिए गए हैं।