वित्त वर्ष 2022-23 के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि के अनुमान में कटौती करने के कुछ दिन बाद वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा है कि वह एशिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था की दीर्घावधि सॉवरिन डेट क्रेडिट रेटिंग और परिदृश्य बरकरार रखेगी।
मूडीज ने आज कहा, ‘भारत का क्रेडिट प्रोफाइल मजबूती दिखा रहा है। उच्च वृद्धि की क्षमता के साथ देश की बड़ी व विविधीकृत अर्थव्यवस्था की तुलनात्मक रूप से बाहरी स्थिति मजबूत है। साथ ही सरकार घरेलू स्तर पर ऋण लेने की मजबूत स्थिति में है।’
एजेंसी ने कहा, ‘वैश्विक अर्थव्यवस्था में हम रूस यूक्रेन के बीच सैन्य टकराव, बढ़ी महंगाई दर और नीतिगत सख्ती के कारण वित्तीय स्थिति कमजोर होने जैसी चुनौतियों के बढ़ने और 2022 और 2023 में इसकी वजह से महामारी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था में आ रहे सुधार के पटरी से उतरने की आशंका नहीं जता रहे हैं।’
वित्त वर्ष 23 की पहली तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर उम्मीद से कम 13.5 प्रतिशत रही है, जबकि वित्त वर्ष 22 की समान अवधि में आधार कम था, जब देश की अर्थव्यवस्था महामारी की डेल्टा लहर से गंभीर रूप से प्रभावित हुई थी। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पहली तिमाही में जीडीपी में 16.2 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया था।
जीडीपी के आधिकारिक अनुमान के बाद कई एजेंसियों ने भारत के जीडीपी के वृद्धि अनुमान में कटौती कर दी। मूडीज ने अपना अनुमान 8.8 प्रतिशत से घटाकर 7.7 प्रतिशत कर दिया और कहा कि बढ़ते ब्याज दर, असमान मॉनसूनी बारिश और वैश्विक वृद्धि सुस्त रहने का असर आने वाली तिमाहियों में भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
मूडीज ने अपनी हाल की रिपोर्ट में कहा है कि स्थिर परिदृश्य से एजेंसी के विचार का पता चलता है कि अर्थव्यवस्था और वित्तीय व्यवस्था के बीच नकारात्मक फीडबैक से होने वाला जोखिम घट रहा है। इसने कहा है कि ज्यादा पूंजी बफर और नकदी की बेहतर स्थिति के बीच बैंक और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) पर जोखिम कम है, जैसा कि पहले अनुमान लगाया गया था। इससे महामारी के बाद चल रही रिकवरी में लाभ होगा।
इसमें कहा गया है, ‘कर्ज के ज्यादा बोझ और कर्ज की वहनीयता की स्थिति बनी हुई है, लेकिन हम उम्मीद करते हैं कि आर्थिक माहौल से धीरे धीरे सरकार को अगले कुछ वर्षों में राजकोषीय घाटा कम करने में मदद मिलेगी।