प्रतीकात्मक तस्वीर
वित्त वर्ष 2027 में खाद्य सब्सिडी पर कुल खर्च 2.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है जबकि बजट में इसके 2.28 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया था। ऊंचे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और ज्यादा सरकारी खरीद के कारण ऐसा होगा। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी जानकारी दी। हालांकि उन्होंने कहा कि सरकार राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने के लिए ज्यादा सख्त ढांचे को लागू कर रही है।
सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘जब भी एमएसपी बढ़ता है, सब्सिडी पर होने वाला खर्च भी बढ़ जाता है। हम वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए ज्यादा सख्त व्यवस्था लागू करने की कोशिश कर रहे हैं।’ अधिकारी ने ये बातें इक्रियर की ओर से ‘गेटिंग एग्रीकल्चर मार्केट्स राइट’ किताब के विमोचन पर आयोजित एक समूह चर्चा में कहीं।
सरकार ने अनुमान लगाया है कि अगर पश्चिम एशिया संकट जारी रहता है तो वित्त वर्ष 2027 में उर्वरक सब्सिडी का खर्च 1.7 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान से बढ़कर लगभग दोगुना 3.4 लाख करोड़ रुपये हो सकता है। अगर ये अनुमान वास्तविकता के करीब रहे तो वित्त वर्ष 2027 में दो सबसे बड़े मद में भारत का कुल सब्सिडी खर्च 3.98 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान से लगभग 48 फीसदी बढ़कर करीब 5.9 लाख करोड़ रुपये हो सकता है।
इस बीच, अधिकारी ने यह भी कहा कि वित्त वर्ष 2027 में देश में गेहूं की सरकारी खरीद 3.5 करोड़ टन रह सकती है। यह पहले अनुमानित 3 करोड़ टन से अधिक है क्योंकि बोनस की घोषणा के कारण कुछ राज्यों में बाजार भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम था।
अधिकारी ने कहा, ‘सही व्यक्ति से खरीद सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने खरीद की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बना दिया है और किसानों के ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा भी शुरू की है। अब किसानों के जमीन के रिकॉर्ड भी सिस्टम से जोड़ दिए गए हैं।’ उन्होंने बताया कि इसकी वजह से इस साल छत्तीसगढ़ में धान खरीद का आंकड़ा पहले के 1 करोड़ टन से घटकर लगभग 72 लाख टन रहा।
उन्होंने बताया, ‘इसके साथ ही साइलो जैसे वैज्ञानिक भंडारण तंत्र के जरिये भंडार प्रबंधन और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन में काफी सुधार हुआ है। इसलिए खरीद से जुड़े कई सुधार लागू किए गए हैं।’ फसलों में विविधता को बढ़ावा देने के लिए ‘श्रीअन्न’ या मोटे अनाजों की खरीद को शून्य से बढ़ाकर लगभग 12 लाख टन कर दिया गया है लेकिन इसमें अभी भी काफी कुछ किया जाना बाकी है।
वरिष्ठ अधिकारी ने यह भी बताया कि सरकार ने एक मजबूत नकदीकरण नीति लागू की है और पिछले साल उसने लगभग 1 करोड़ टन चावल का नकदीकरण किया। उन्होंने कहा, ‘हमने एक नई नीति शुरू की है जिसके तहत अभी जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) के लाभार्थियों को ऐसा चावल मिलता है जिसमें 25 फीसदी तक टूटे दाने होते हैं। इस टूटे दानों का हिस्सा घटाकर 10 फीसदी करने का प्रस्ताव है। इससे हमें लगभग 90 लाख टन टूटा चावल मिल सकता है और ऐसा कुल खरीद बढ़ाए बिना भी हो सकता है।’
आने वाले दिनों में 90 लाख टन अतिरिक्त खराब और टूटे चावल का इस्तेमाल पीडीएस के अलावा पशु आहार, खाद्य प्रसंस्करण और अन्य संबंधित उद्योग में किया जा सकता है। अधिकारी ने बताया कि केंद्र की पीडीएस लाभार्थियों की संख्या कम करने की कोई योजना नहीं है लेकिन फर्जी लाभार्थियों को सक्रिय रूप से हटाने के कारण कुल लाभार्थियों की संख्या 80 करोड़ से घटकर लगभग 79 करोड़ रह गई है।