कुछ साल पहले भारत और न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर करने के करीब थे, पर भारत सौदे से बाहर हो गया। न्यूजीलैंड के व्यापार, निर्यात वृद्धि और कृषि मंत्री डेमियन ओ’कॉनर ने संजीव मुखर्जी से कहा कि डेरी उनके देश की सबसे बड़ी निर्यात सामग्री है। संपादित अंश..
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापार समझौता हो गया है। आपको क्यों लगता है कि भारत और न्यूजीलैंड बातचीत करने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं?
जाहिर है, डेरी भारत का एक बड़ा मुद्दा है और यहां इसका सबसे बड़ा क्षेत्र है और हम न्यूजीलैंड में भी डेरी के सबसे बड़े निर्यातक हैं। भारत में यह सबसे संवेदनशील मुद्दा भी है। लेकिन, हमारा मानना है कि डेरी उद्योग में भागीदारी के अवसर हैं जो दोनों देशों के मूल्यों पर आधारित होंगे। यह केवल डेरी में वस्तुओं का व्यापार नहीं है, बल्कि यह प्रौद्योगिकी, तकनीकों को साझा कर भारतीय डेरी उद्योग की उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में सहायता कर सकता है।
कुछ ऐसा ही हम हरियाणा के बिनसर फार्म में करते हैं। (बिनसर फार्म में न्यूजीलैंड के निवेशक और विशेषज्ञ स्थानीय लोगों के साथ काम कर रहे हैं। इलाके के अन्य किसानों के साथ ज्ञान साझा करना इसका मुख्य उद्देश्य है।) देखिए, न्यूजीलैंड का अमेरिका के साथ कोई एफटीए नहीं है, फिर भी यह हमारा चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। उम्मीद है हम यहां भी ऐसा ही करेंगे।
ऐसे कौन से अन्य क्षेत्र हैं जिनपर आपकी नजर है?
हम गेमिंग और आईपी जैसी सेवाओं और क्षेत्रों में काफी आगे बढ़ रहे हैं, हमारे लिए इंजीनियरिंग जैसी सेवाएं बड़ी हैं। भारत हमारे गेमिंग उद्योग को समर्थन कर सकता है। हमारे पास पर्यावरणीय क्षेत्रों में वस्तु एवं सेवाएं हैं और हम भारत के साथ इसके लिए सहयोग कर सकते हैं, बशर्ते यहां टैरिफ की बाधाएं कम हों। जलवायु परिवर्तन भारत और न्यूजीलैंड दोनों के लिए एक साझा चुनौती और हम यहां भी भारत के साथ सहयोग के लिए सोच सकते हैं।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच अभी कितना व्यापार हो रहा है और अगले 5 वर्षों में इसे आप कहां देखते हैं?
वर्तमान में, दोनों देशों के बीच सालाना 2 अरब डॉलर के करीब का द्विपक्षीय व्यापार हो रहा है और हमारी कोशिश है कि अगले 5 वर्षों में इसे दोगुना कर दें।