वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की सालाना बैठक में हिस्सा लेने अगले सप्ताह अमेरिका जाएंगी। यह बैठक 10 से 16 अक्टूबर तक चलेगी। उम्मीद की जा रही है कि वित्त मंत्री अन्य देशों के वित्त मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगी। साथ ही जी-20 की बैठक भी होने की संभावना है, जिसमें इस बहुपक्षीय समूह की भारत द्वारा की जाने वाली अध्यक्षता पर ध्यान होगा।
वाशिंगटन डीसी में आईएमएफ-विश्व बैंक की बैठक के अलावा वित्त मंत्री कुछ थिंक टैंक और ब्रूकिंग्स और जॉन हॉपकिंस युनिवर्सिटी जैसी संस्थाओं में भी भाषण देंगी। उसके बाद वह टैक्सस में निवेशकों के साथ बैठक कर सकती हैं, जिसमें भारत में किए जाने वाले निवेश पर चर्चा होगी। हालांकि इस योजना को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है।
भारत कोविड-19 महामारी से उबर रहा है, वहीं हाल की भूराजनीतिक स्थितियों का विपरीत असर भी पड़ा है। इसके बावजूद भारत सबसे तेज बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में है। निवेशकों तक पहुंच बनाने की कवायद की रूपरेखा तैयार करने में मदद कर रहे एक अधिकारी ने कहा कि भारत को एक स्थिर, आकर्षक औऱ निवेश के बेहतर केंद्र के रूप में दिखाने की कवायद होगी।
आईएमएफ विश्व बैंक की सालाना बैठक में यूरोप में चल रही जंग और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले उसके असर पर मुख्य रूप से चर्चा होने की संभावना है। यूरोप के कुछ विकसित देशों व उत्तरी अमेरिका के देशों में मंदी आने की संभावना है, जिसकी वजह से निश्चित रूप से वैश्विक व्यापार प्रभावित होगा।
अपने पिछले वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में आईएमएफ ने 2022 में वैश्विक वृद्धि अनुमान 0.4 प्रतिशत घटाकर 3.2 प्रतिशत कर दिया था, जो 2021 में 6.1 प्रतिशत था।
आईएमएफ ने कहा है, ‘कुछ झटकों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है, जो पहले ही महामारी से जूझ रहे हैं। पूरी दुनिया में उम्मीद से ज्यादा महंगाई है, खासकर अमेरिका और यूरोप में। इसकी वजह से मौद्रिक सख्ती हो रही है। वहीं चीन में अनुमान से ज्यादा हालत खराब है। साथ ही यूक्रेन युद्ध का आगे और नकारात्मक असर पड़ने की संभावना है।’