वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने अपने पहले दौर के निरीक्षण और जुर्माने के तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में 344 उद्योगों को बंद करने के आदेश दिए हैं। ये उद्योग दिसंबर 2021 से वायु प्रदूषण मानदंडों का उल्लंघन कर रहे थे। आयोग के उड़ाका दस्ते ने 484 इकाइयों या प्रतिष्ठानों को बंदी का नोटिस जारी किया है। उद्योगों के अलावा 99 निर्माण व ध्वस्तीकरण (सीऐंडडी) साइटों, 41 डीजल जेनरेटरों को भी प्रवर्तन कार्यबल (ईटीएफ) ने बंदी का नोटिस दिया है।
सीएक्यूएम के आंकड़ों के मुताबिक 30 सितंबर तक कुल 8,270 स्थलों का निरीक्षण दिसंबर 2021 से किया गया, जिससे कि आयोग द्वारा जारी वैधानिक दिशानिर्देशों का अनुपालन हो सके। सीएक्यूएम के मुताबिक बिल्कुल अनुपालन न करने वाली इकाइयों को तत्काल बंद किया गया है। मामूली उल्लंघन करने वालों के मामले को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के पास समुचित कार्रवाई के लिए भेजा गया है।
सीएक्यूएम के एक अधिकारी ने कहा, ‘प्रदूषण मानकों का पालन न करने वाली इकाइयों को बंदी का नोटिस जारी किया गया है।’ अधिकारी ने कहा कि जरूरी मानकों को पूरा करने के बाद उन्हें कामकाज शुरू करने की अनुमति होगी।
उत्तर प्रदेश की इकाइयों को सबसे ज्यादा 208 जांच और बंदी का नोटिस जारी किया गया है। दिल्ली में 109, हरियाणा के एनसीआर क्षेत्र में 116, राजस्थान के एनसीआर में 51 स्थलों को बंदी का नोटिस मिला है। कुल 484 साइट में से 364 इकाइयों या प्रतिष्ठानों, जिनमें 271 उद्योग, 57 सीऐंडडी, 36 डीजी सेट्स हैं, को पर्यावरण मुआवजा शुल्क देने के बाद कामकाज बहाल करने की अनुमति दी गई थी।
विभाग द्वारा करीब 50 प्रतिशत जांच व बंदी नोटिस नवंबर और फरवरी के बीच जारी किए गए। सीएक्यूएम अधिकारी ने कहा, ‘सभी मामलों में करीब आधे मामले जाड़े के 4 महीनों के दौरान आए हैं।’इन्हीं महीनों में पड़ोसी राज्यों हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटना होती है, जिससे दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता बहुत खराब हो जाती है।