रिजर्व बैंक द्वारा लाए गए भारत बिल पेमेंट सिस्टम (बीबीपीएस) से हर माह 8 करोड़ लेन-देन हो रहे हैं। भारत बिलपे की सीईओ नूपुर चतुर्वेदी ने स्वप्निल जोगलेकर से कहा कि इसके विस्तार के लिए 3 दीर्घावधि रणनीति पर काम जारी है। संपादित अंश
इस महीने रिजर्व बैंक ने प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) को भारत में रह रहे अपने परिवार के उपयोगिता बिलों के भुगतान बीबीपीएस से करने की अनुमति दी है। क्या इससे सिर्फ सुविधा बढ़ेगी या विदेश से ज्यादा धन आ सकेगा?
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) अपने समावेशन के एजेंडे पर चल रहा है। इस समय 3 करोड़ से ज्यादा भारतीय विदेश में रह रहे हैं। साथ ही विदेश से धन लाने के मामले में भारत सबसे बड़े प्राप्तकर्ताओं में से एक है। हम चाहते थे कि प्रवासी भारतीयों और पीआईओ (भारतीय मूल के लोग) के लिए यह पूरी प्रक्रिया बाधारहित और आसान बने। इस हिसाब से हमारा भी मानना है कि सुविधा बढ़ने के कारण लेन-देन की संख्या बढ़ेगी। यह सुविधा धनराशि में बदलती है या नहीं, वक्त बताएगा।
क्या इस सुविधा के लिए बैक-एंड तैयार है?
हां, और नहीं। हर एनआरआई भुगतान में दो चरण होंगे। पहला चरण भारत से जुड़ा है और यह मौजूदा बीबीपीएस व्यवस्था है, जो तैयार और प्रतीक्षारत है। बहरहाल अंतरराष्ट्रीय चरण पर काम होना है। यह व्यवस्था शुरू करने के पहले हम नियामकों से परिचालन को लेकर और स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं।
कब यह सुविधा शुरू होने की उम्मीद है?
उम्मीद है अगले कुछ महीने में। निश्चित इस कैलेंडर वर्ष में।
धोखाधड़ी रोकने के लिए आप क्या कर रही हैं?
हमारी बहुत मजबूत धोखाधड़ी जोखिम प्रबंधन (एफआरए) व्यवस्था है, जहां हम मामलों की तेजी की जांच व अन्य जांच करते हैं। बीबीपीएस सिस्टम में शामिल होने वाले हर बिलर हमारे निश्चित प्रक्रियाओं से गुजरता है, ऐसे में कोई भी दुरुपयोग नहीं कर सकता।
बीबीपीएस के लिए आगे क्या है?
संभावनाएं व्यापक हैं। पूरा बी2बी कार्यक्षेत्र अलग तरह से काम कर रहा है। हम जहां पहुंचना चाहते हैं, उसमें अभी 3 से 5 साल का वक्त लगेगा।