अर्थव्यवस्था

हर महीने ₹30,000 करोड़ का नुकसान! आखिर कब तक पेट्रोल-डीजल के दाम रोक पाएगी सरकार?

IOC, BPCL और HPCL पर बढ़ा भारी दबाव, क्या अब पेट्रोल-डीजल महंगा होना तय है?

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रिमझिम सिंह   
Last Updated- May 13, 2026 | 3:38 PM IST

पश्चिम एशिया युद्ध और महंगे कच्चे तेल के बीच भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें लंबे समय से स्थिर बनी हुई हैं। जहां दुनिया के कई देशों में ईंधन के दाम 20 से 50 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं, वहीं भारत में आम लोगों को राहत देने के लिए सरकार ने तेल की खुदरा कीमतों को ज्यादा नहीं बढ़ाया। लेकिन इसका बड़ा बोझ अब सरकारी तेल कंपनियों पर पड़ रहा है।

इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों से कम दाम पर पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस बेच रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन कंपनियों को हर महीने करीब 30,000 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर सरकार और तेल कंपनियां कब तक कीमतें रोके रख पाएंगी।

आम लोगों को राहत, लेकिन कंपनियों पर बढ़ा दबाव

दिल्ली में फिलहाल पेट्रोल करीब 94 रुपये प्रति लीटर, डीजल 87 रुपये प्रति लीटर और घरेलू एलपीजी सिलेंडर लगभग 993 रुपये में मिल रहा है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें काफी ऊपर बनी हुई हैं। मार्च में सरकार के एक आकलन के मुताबिक पेट्रोल पर करीब 26 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 82 रुपये प्रति लीटर तक की कम वसूली हो रही थी। यानी तेल कंपनियां हर दिन हजारों करोड़ रुपये का बोझ उठा रही हैं।

कच्चा तेल महंगा रहा तो मुश्किल बढ़ेगी

रेटिंग एजेंसी इक्रा का कहना है कि अगर कच्चा तेल 120 से 125 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहता है, तो तेल कंपनियों का नुकसान और बढ़ सकता है। इक्रा के मुताबिक पेट्रोल पर करीब 14 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 18 रुपये प्रति लीटर तक का नकारात्मक मार्जिन हो सकता है। वहीं घरेलू गैस पर कुल नुकसान FY27 में 80,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इक्रा के वरिष्ठ अधिकारी प्रशांत वशिष्ठ ने कहा कि अगर लंबे समय तक यही स्थिति बनी रही, तो इतने बड़े नुकसान को संभालना आसान नहीं होगा।

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70 दिन से लगातार दबाव में हैं कंपनियां

ग्रेट लेक्स इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के अर्थशास्त्री वीपी सिंह के मुताबिक तेल कंपनियां पिछले 70 दिनों से लगातार कम वसूली का सामना कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इन 10 हफ्तों में कंपनियों पर 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का दबाव बन चुका है। उनके मुताबिक अब कंपनियों को ज्यादा कर्ज लेना पड़ सकता है और कई बड़े प्रोजेक्ट्स को टालना पड़ सकता है।

रिफाइनरी और पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स पर असर का खतरा

अगर यही स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो इसका असर सिर्फ मुनाफे पर नहीं बल्कि देश के ऊर्जा ढांचे पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि रिफाइनरी विस्तार, पाइपलाइन सुधार और लॉजिस्टिक्स से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट्स धीमे पड़ सकते हैं। इससे भविष्य में भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की योजनाओं पर असर पड़ सकता है।

क्या पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं?

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि आने वाले समय में सरकार को पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ सकता है। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का कहना है कि कीमतें बढ़ाने का फैसला कभी भी लिया जा सकता है। हालांकि सरकार फिलहाल महंगाई को लेकर सावधानी बरत रही है। अगर पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते हैं, तो खुदरा महंगाई और ऊपर जा सकती है। RBI पहले ही FY27 के लिए महंगाई 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान दे चुका है। ऐसे में ईंधन महंगा होने से महंगाई और बढ़ सकती है।

सरकार के पास क्या विकल्प हैं?

विशेषज्ञों के मुताबिक सरकार के पास अभी कुछ रास्ते मौजूद हैं। सरकार एक्साइज ड्यूटी घटा सकती है, तेल कंपनियों को सीधे मदद दे सकती है या फिर धीरे-धीरे कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती है। कुछ जानकारों का मानना है कि अगर कीमतें लंबे समय तक नहीं बढ़ाई गईं, तो सरकार को तेल कंपनियों को किसी न किसी रूप में मुआवजा देना पड़ सकता है।

आखिर कब तक मिलती रहेगी राहत?

फिलहाल सरकार आम लोगों को महंगे तेल का सीधा असर महसूस नहीं होने देना चाहती। लेकिन दूसरी तरफ इसका बोझ सरकारी कंपनियों और सरकारी खजाने पर बढ़ता जा रहा है। सरकार पहले ही चालू खाते के घाटे को संभालने के लिए सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ा चुकी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अगर कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा बना रहा, तो क्या आने वाले महीनों में पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम बढ़ाना सरकार की मजबूरी बन जाएगा।

First Published : May 13, 2026 | 3:29 PM IST