अर्थव्यवस्था

चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल 15 रुपये तक हो सकते हैं महंगे, दाम बढ़े तो थम जाएंगे 30% ट्रकों के पहिए

फिलहाल सरकार उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखे हुए है, जबकि सरकारी तेल कंपनियां नुकसान सह रही हैं

Published by
एजेंसियां   
Last Updated- April 20, 2026 | 3:49 PM IST

देश में डीजल की कीमतों को लेकर जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लंबे समय से स्थिर चल रही ईंधन कीमतें अब बढ़ने की कगार पर हैं, जिससे ट्रांसपोर्ट सेक्टर और आम लोगों दोनों पर असर पड़ सकता है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल बढ़ गई है और भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर इसका दबाव साफ दिखने लगा है।

चुनाव के बाद बढ़ सकते हैं डीजल के दाम

फिलहाल सरकार उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखे हुए है, जबकि सरकारी तेल कंपनियां नुकसान सह रही हैं। लेकिन माना जा रहा है कि अगले हफ्ते क्षेत्रीय चुनाव खत्म होने के बाद कीमतों में बढ़ोतरी की जा सकती है। अगर ऐसा होता है, तो इससे महंगाई पर भी असर पड़ेगा और ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ सकती है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के कार्यकारी सदस्य शैलेंद्र गुप्ता का कहना है, “चुनाव के बाद डीजल के दाम बढ़ेंगे। अभी ही करीब 10 प्रतिशत ट्रक खड़े हैं और अगर कीमतें बढ़ती हैं तो यह संख्या 30 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।”

ईंधन की अनौपचारिक कमी, ट्रक ड्राइवर परेशान

ट्रक चालकों के मुताबिक, कई जगहों पर डीजल की अनौपचारिक रूप से सीमित सप्लाई की जा रही है। उन्हें बार-बार रुककर ईंधन भरवाना पड़ रहा है, जिससे डिलीवरी में देरी हो रही है। पहले पेट्रोल पंप बड़ी खरीद पर जो छूट देते थे, वह भी अब खत्म कर दी गई है, जिससे लागत और बढ़ रही है।

भारत में करीब 70 प्रतिशत माल ढुलाई सड़कों के जरिए होती है, ऐसे में डीजल की कीमत और उपलब्धता पूरी अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है।

प्राइवेट कंपनियों ने बढ़ाया दबाव

प्राइवेट कंपनियां जैसे नायरा एनर्जी और रिलायंस इंडस्ट्रीज (अपने पार्टनर बीपी के साथ) पहले ही ईंधन की कीमतें बढ़ा चुकी हैं या सप्लाई सीमित कर रही हैं। इसके चलते सरकारी पेट्रोल पंपों पर अचानक मांग बढ़ गई है।

ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय बंसल ने कहा, “सरकारी पंपों पर कोई आधिकारिक राशनिंग नहीं है, लेकिन प्राइवेट कंपनियों की सप्लाई कम होने से मांग अचानक बढ़ी है, जिससे कुछ जगहों पर ईंधन खत्म होने जैसी स्थिति बन रही है और बिक्री सीमित करनी पड़ रही है।”

सरकार ने किया साफ- घबराने की जरूरत नहीं

सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे घबराकर ईंधन की ज्यादा खरीदारी न करें। सरकार का कहना है कि देशभर में पेट्रोल पंप सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और फिलहाल कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। इसके अलावा, सरकार पहले ही पेट्रोल-डीजल पर टैक्स कम कर चुकी है और निर्यात पर टैक्स बढ़ाकर घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की है।

Also Read | अल नीनो का बढ़ता खतरा, तेल झटका और युद्ध का असर; क्या दुनिया मंदी की ओर, भारत कितना सुरक्षित?

विशेषज्ञों की चेतावनी- कीमतें बढ़ना तय

स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक की अर्थशास्त्री अनुभूति सहाय की अगुवाई में आई रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर कच्चे तेल की औसत कीमत इस वित्त वर्ष में 95 डॉलर प्रति बैरल रहती है, तो सरकार को पेट्रोल और डीजल के दाम 8 से 15 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ाने पड़ सकते हैं। वहीं अगर कच्चा तेल 85 से 90 डॉलर के बीच रहता है, तब भी 3 से 7 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी संभव है।

सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 96 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रही, जो इस दबाव को और बढ़ा रही है। भारत में आखिरी बार बड़े स्तर पर ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी साल 2022 में हुई थी। (ब्लूमबर्ग के इनपुट के साथ)

First Published : April 20, 2026 | 3:49 PM IST