अर्थव्यवस्था

PM Modi UAE Visit: होर्मुज संकट के बीच फुजैरा पर भारत की नजर, PM के दौरे में इसपर सबसे ज्यादा फोकस

प्रधानमंत्री मोदी की यूएई यात्रा ऊर्जा सुरक्षा और फुजैरा बंदरगाह के विकास पर केंद्रित होगी। इसका उद्देश्य होर्मुज संकट को दरकिनार कर भारत की तेल आपूर्ति सुनिश्चित करना है

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अर्चिस मोहन   
Last Updated- May 12, 2026 | 11:14 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुक्रवार को अबू धाबी में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति के साथ होने वाली बातचीत द्विपक्षीय ऊर्जा सहयोग पर केंद्रित होगी। उनका यह दौरा उस समय हो रहा है जब प्रधानमंत्री ने रविवार शाम को नागरिकों से तेल का विवेकपूर्ण उपयोग करने की अपील की थी।

हाल के सप्ताहों में भारत और यूएई ने होर्मुज स्ट्रेट की बाधा को दरकिनार करने के विकल्पों की तलाश की है। इसमें भारतीय जहाजों द्वारा ओमान की खाड़ी में स्थित फुजैरा बंदरगाह से अधिक तेल और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की खेप मंगवाना शामिल हो सकता है। भारत की भारी ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए, ऐसी किसी योजना के लिए फुजैरा तेल टर्मिनल की क्षमता बढ़ाने और यूएई द्वारा अबू धाबी के हबशन टर्मिनल से फुजैरा तक एक अतिरिक्त पाइपलाइन बिछाने की आवश्यकता होगी।  

वर्तमान में, मौजूदा 406 किलोमीटर लंबी तेल पाइपलाइन अबू धाबी के तेल क्षेत्रों को हबशन टर्मिनल से जोड़ती है और वहां से फुजैरा टर्मिनल तक जाती है। यह होर्मुज स्ट्रेट को दरकिनार करती है, लेकिन इसकी क्षमता केवल 15 से 18 लाख बैरल तेल प्रतिदिन स्थानांतरित करने की है। यूएई की वर्तमान कच्चे तेल उत्पादन क्षमता 48.5 लाख बैरल प्रतिदिन है, लेकिन वह 34 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन कर रहा था, जिसे वह तेल उत्पादक और निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) और ओपेक प्लस से बाहर निकलने के बाद बढ़ाना चाहता है। भारत की दैनिक तेल खपत 55 लाख बैरल है।  

यूएई ने 4 मई को ईरान पर फुजैरा की तेल अधोसंरचना पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले करने का आरोप लगाया। 5 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फुजैरा बंदरगाह शहर पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की जिनमें तीन भारतीय नागरिक घायल हुए थे। प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि भारत खाड़ी राष्ट्र के साथ दृढ़ एकजुटता में खड़ा है।

उन्होंने कहा, ‘होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित और निर्बाध नौवहन सुनिश्चित करना क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।’

प्रधानमंत्री 15 से 20 मई तक यूरोप के चार देशों का दौरा भी करेंगे, जिसमें वे नीदरलैंड (15-17 मई), स्वीडन (17-18 मई), नॉर्वे (18-19 मई) और इटली (19-20 मई) भी जाएंगे। मोदी 19 मई को नॉर्वे के ओस्लो में तीसरे भारत-नॉर्डिक सम्मेलन में भाग लेंगे।  सूत्रों के अनुसार शुक्रवार को यूएई में ठहराव प्रधानमंत्री की यात्रा सूची में बाद में जोड़ा गया। ऐसा पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण भारत की ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधाओं के चलते किया गया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 11-12 अप्रैल को यूएई का दौरा किया था, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 27 अप्रैल को और विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 7 मई को वहां की यात्रा की थी।  

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को कहा कि यूएई का दौरा प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा का पहला पड़ाव होगा। उन्होंने कहा कि भारत-यूएई संबंध बहुआयामी हैं, लेकिन ऊर्जा संबंध अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं। इस दौरान दोनों पक्ष ऊर्जा संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ यूएई में रहने और काम करने वाले 45 लाख भारतीयों के कल्याण पर भी चर्चा करेंगे। पिछले 12 वर्षों में भारत-यूएई संबंध मजबूत हुए हैं। यूएई के राष्ट्रपति 19 जनवरी को भारत आए थे। यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और पिछले 25 वर्षों में सातवां सबसे बड़ा निवेश स्रोत है।  

ऊर्जा संबंधों की बात करें तो, पिछले वर्ष यूएई भारत की कच्चे तेल की आपूर्ति का चौथा सबसे बड़ी स्रोत था जो भारत की लगभग 11 प्रतिशत आवश्यकता पूरी करता है। यूएई भारत के लिए एलएनजी का तीसरा सबसे बड़ा स्रोत है। भारतीय कंपनियों और यूएई की अबू धाबी नैशनल ऑयल कंपनी (एडीएनओसी) ने 4.5 एमएमटीपीए एलएनजी की दीर्घकालिक आपूर्ति अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे भारत यूएई का सबसे बड़ा एलएनजी खरीदार बन गया है।  यूएई भारत के लिए एलपीजी का भी सबसे बड़ा स्रोत है जो भारत की लगभग 40 प्रतिशत आवश्यकता पूरी करता है। 

भारतीय कंपनियों ने यूएई के अपस्ट्रीम सेक्टर में 1.2 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है। 2018 में भारतीय कंपनियों  के एक समूह ने यूएई के लोअर जाकुम ब्लॉक में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी ली। 2019 में भारतीय संयुक्त उद्यम कंपनी उर्जा भारत प्राइवेट लिमिटेड (बीपीआरएल और आईओसीएल का संयुक्त उपकरण) ने अबू धाबी ऑनशोर ब्लॉक-1 में हिस्सेदारी ली। जनवरी 2026 में बीपी आरएल ने अबू धाबी के ऑनशोर ब्लॉक-1 में तेल की खोज की पुष्टि की। यह पश्चिम एशिया क्षेत्र में भारतीय कंपनियों द्वारा अपस्ट्रीम सेक्टर में पहला निवेश है। यूएई भारत के साथ रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में साझेदारी करने वाला पहला देश रहा है। 

2018 में भारतीय रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार लिमिटेड (आईएसपीआरएल) और एडीएनओसीने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत यूएई ने मैंगलोर स्थित आईएसपीआरएल की इकाई में 50 लाख बैरल से अधिक कच्चे तेल का भंडार रखा।   भारत और यूएई नवीकरणीय ऊर्जा में भी सहयोग बढ़ा रहे हैं। अक्टूबर 2024 में एमएएसडीएआरऔर राजस्थान सरकार के बीच 60 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने के लिए समझौता हुआ। दोनों पक्ष ग्रिड इंटरकनेक्शन के लिए व्यवहार्यता अध्ययन भी कर रहे हैं।  

First Published : May 12, 2026 | 10:23 PM IST