facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

Q2FY25 Capex: सितंबर तिमाही में निजी क्षेत्र का पूंजीगत खर्च 42 फीसदी बढ़ा, सरकारी परियोजनाओं में भी आई तेजी

Advertisement

जून तिमाही में चुनावों के कारण नई परियोजना की घोषणाओं में सुस्ती देखी गई थी। परियोजनाओं के पूरा होने की बात करें तो सितंबर तिमाही में जून तिमाही के मुकाबले थोड़ी कमी देखी गई।

Last Updated- October 02, 2024 | 12:58 PM IST
Capex

निजी क्षेत्र की कंपनियों ने जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान 4.1 लाख करोड़ रुपये मूल्य की नई परियोजनाएं और कारखाने लगाने की घोषणाएं की हैं। परियोजनाओं पर नजर रखने वाली संस्था सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (सीएमआईआई) के आंकड़ों के अनुसार यह पिछले साल की समान अव​धि की तुलना में 42 फीसदी अ​धिक है।

सरकार द्वारा 1.4 लाख करोड़ रुपये लागत वाली सड़क, रेलवे और इसी तरह की नई परियोजनाओं की घोषणाओं को भी शामिल कर लें तो सितंबर में समाप्त हुई तिमाही में कुल 5.49 लाख करोड़ रुपये की नई परियोजनाओं का ऐलान किया गया है। जून तिमाही में चुनावों के कारण नई परियोजना की घोषणाओं में सुस्ती देखी गई थी।

परियोजनाओं के पूरा होने की बात करें तो सितंबर तिमाही में जून तिमाही की तुलना में थोड़ी कमी देखी गई। निजी क्षेत्र और सरकार की कुल 80,000 करोड़ रुपये मूल्य की परियोजनाएं इस दौरान पूरी हुईं जबकि पिछले साल सितंबर तिमाही के दौरान 1.9 लाख करोड़ रुपये मूल्य की परियोजनाएं बनकर तैयार हो गई थीं।

परियोजनाओं के क्षेत्रवार आंकड़े देखें तो विनिर्माण क्षेत्र में सबसे अ​धिक मूल्य की परियोजनाओं की घोषणा की गईं। सितंबर तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र से जुड़ी 3.39 लाख करोड़ रुपये मूल्य की नई परियोजनाओं का ऐलान किया गया। यह पिछले साल की समान अव​धि की 1.4 लाख करोड़ रुपये मूल्य की परियोजनाओं से दोगुने से भी ज्यादा है। सेवाओं (वित्तीय सेवाओं को छोड़कर), निर्माण और रियल एस्टेट परियोजनाओं में भी तेजी आई है। बिजली क्षेत्री की नई परियोजनाओं में गिरावट आई है।

डीआर चोकसी फिनसर्व के प्रबंध निदेशक देवेन चोकसी के अनुसार नवीकरणीय ऊर्जा, धातु, औद्योगिक एवं आर्टिफिशल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में भी निवेश बढ़ा है। उन्होंने कहा, ‘ज्यादातर पैसा कंपनियां आंतरिक संसाधनों से जुटा रही हैं और परियोजनाओं के लिए इ​क्विटी के जरिये भी पैसे जुटाए जा रहे हैं।’

स्वतंत्र बाजार विश्लेषक आनंद टंडन ने कहा कि इ​क्विटी पूंजी की आसान उपलब्धता से विस्तार योजनाओं को गति मिल रही है मगर बढ़ते पूंजीगत खर्च में बड़ा हिस्सा उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) जैसी सरकारी पहल की बदौलत आ रहा है। इसके साथ ही हाल के दिनों में सरकारी खर्च में वृद्धि हुई है जिसका असर निजी क्षेत्र के ऑर्डर पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार की ओर से बढ़ावा नहीं मिलता तो जरूरी नहीं है कि बड़े स्तर पर क्षमता विस्तार पर कंपनियां निवेश के लिए आगे आतीं।

आ​धिकारिक आंकड़ों के अनुसार क्षमता उपयोग का मौजूदा स्तर मांग में कुछ सुधार का संकेत दे रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक का मार्च 2024 का ऑर्डर बुक, इन्वेंट्री और क्षमता उपयोग सर्वेक्षण पिछले महीने जारी हुआ था।

इसमें कहा गया है, ‘समग्र स्तर पर विनिर्माण क्षेत्र में क्षमता उपयोग वित्त वर्ष 2024 की चौथी तिमाही में बढ़कर 76.8 फीसदी रहा जो इससे पिछली तिमाही में 74.7 फीसदी था। हालांकि मौसमी समायोजित क्षमता उपयोग 74.6 फीसदी पर ​स्थिर रहा।’ सिंतबर 2024 के ईवाई इकॉनमी वॉच रिपोर्ट के अनुसार भी निजी क्षेत्र में निवेश बढ़ने का संकेत मिलता है।

Advertisement
First Published - October 1, 2024 | 9:49 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement