प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सेंट्रल बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 2.87 लाख करोड़ रुपये का अधिशेष केंद्र सरकार को हस्तांतरित करने का फैसला किया है जो पिछले साल के रिकॉर्ड 2.69 लाख करोड़ रुपये लाभांश से भी करीब 7 फीसदी अधिक है। हालांकि केंद्रीय बैंक ने आकस्मिक जोखिम बफर (सीआरबी) के तहत जोखिम प्रावधान को घटाकर बैलेंस शीट के 6.5 फीसदी तक करने का फैसला किया है, भले ही उसका प्रावधान बढ़ गया है। विदेशी मुद्रा भंडार बिक्री से आरबीआई को आय बढ़ाने में मदद मिली है। वित्त वर्ष 2025 के लिए सीआरबी को बैलेंस शीट के 7.5 फीसदी पर रखा गया था।
31 मार्च, 2026 तक आरबीआई की बैलेंस शीट 20.61 फीसदी बढ़कर 91.97 लाख करोड़ रुपये हो गई। इससे पिछले वित्त वर्ष की तुलना में इसकी सकल आय 26.42 फीसदी बढ़ी जबकि जोखिम प्रावधानों से पहले व्यय 27.60 फीसदी बढ़ा।
आरबीआई का वित्त वर्ष 2025-26 में जोखिम प्रावधान और वैधानिक निधियों में हस्तांतरण से पहले शुद्ध आय 3.96 लाख करोड़ रुपये रही जो वित्त वर्ष2025 के 3.13 लाख करोड़ रुपये की तुलना में अधिक है। आरबीआई ने कहा, ‘संशोधित आर्थिक पूंजी ढांचा (ईसीएफ) आकस्मिक जोखिम बफर को बैलेंस शीट के आकार के 4.5 फीसदी से 7.5 फीसदी के बीच बनाए रखने का लचीलापन प्रदान करता है।’
पिछले साल यह दायरा 5.5 से 6.5 फीसदी था। बयान में कहा गया है, ‘वर्तमान व्यापक आर्थिक कारकों, बैंक के वित्तीय प्रदर्शन और उचित जोखिम बफर को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सीआरबी में 1.09 लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित करने का निर्णय लिया है, जो वित्त वर्ष 2025 के 44,861.70 करोड़ रुपये की तुलना में अधिक है। आरबीआई बैलेंस शीट के आकार का 6.5 फीसदी सीआरबी बनाए रखेगा।’
अधिशेष हस्तांतरण का यह निर्णय आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में मुंबई में आयोजित आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल की 623वीं बैठक में लिया गया।
अर्थशास्त्रियों ने कहा कि सीआरबी अनुपात में कमी के बावजूद उच्च प्रावधान आवश्यकताओं के कारण अधिशेष बाजार की उम्मीदों से कम रहा।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता ने कहा, ‘भारतीय रिजर्व बैंक का अधिशेष हस्तांतरण बाजार अनुमान से इसलिए कम रहा क्योंकि प्रावधान उम्मीद से अधिक रहा।’
एमके ग्लोबल की प्रमुख अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने कहा, ‘सीआरबी अनुपात को 7.5 फीसदी से घटाकर 6.5 फीसदी करने के बावजूद वित्त वर्ष 2026 में आरबीआई की बैलेंस शीट में 21 फीसदी की सालाना वृद्धि के कारण प्रावधान दोगुना से अधिक होकर 1.09 लाख करोड़ रुपये हो गया।’
आरबीआई से रिकॉर्ड हस्तांतरण के बावजूद उच्च सब्सिडी और कम कर संग्रह के कारण राजकोषीय स्थिति पर दबाव बना रहने के आसार हैं।
इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, ‘बजट अनुमान की तुलना में उर्वरक और ईंधन सब्सिडी की उच्च आवश्यकता और कम कर संग्रह तथा तेल कंपनियों से कम लाभांश के कारण राजकोषीय दबाव बना रह सकता है।’
इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र कुमार पंत ने कहा कि भू-राजनीतिक स्थिति के कारण उच्च हस्तांतरण से राजकोषीय घाटे पर कुछ दबाव कम होगा।