अर्थव्यवस्था

Weekly Economy Wrap: ब्याज दरों पर RBI की ब्रेक, मजबूत GDP के साथ बदले आर्थिक समीकरण

बीते हफ्ते RBI MPC के बाद रीपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा गया, लेकिन पश्चिम एशिया संकट, महंगाई और LPG के बढ़ते दामों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है

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ऋषभ शर्मा   
Last Updated- June 07, 2026 | 1:11 PM IST

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बीता हफ्ता नीतिगत फैसलों और मजबूत आर्थिक आंकड़ों के नाम रहा। एक तरफ जहां रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने रीपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया, वहीं दूसरी तरफ उम्मीद से बेहतर रहे GDP के आंकड़ों ने आर्थिक मजबूती के संकेत दिए। हालांकि, इन सबके बीच नीति निर्माताओं की नजरें महंगाई, ईंधन की कीमतों और बाहरी व्यापारिक जोखिमों पर टिकी हुई हैं।

लगातार तीसरी बार नहीं बदली ब्याज दरें

RBI ने अपनी समीक्षा बैठक में मुख्य नीतिगत दर यानी रीपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा है। यह लगातार तीसरी बार है जब केंद्रीय बैंक ने दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। इसके साथ ही RBI ने अपना रुख ‘न्यूट्रल’ (तटस्थ) रखा है। हालांकि, पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहे युद्ध के असर को देखते हुए RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए महंगाई के अनुमान को बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है। बैंक को डर है कि भोजन, ईंधन और बाहरी मोर्चे पर कीमतों का दबाव बढ़ सकता है।

GDP के आंकड़ों ने चौंकाया, पर आगे सुस्ती के आसार

चौथी तिमाही (Q4FY26) में भारत की GDP ग्रोथ रेट 7.8 प्रतिशत रही है, जिसने तमाम अनुमानों को पीछे छोड़ दिया। इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत पूरे साल की GDP ग्रोथ 7.7 प्रतिशत दर्ज की गई है। लेकिन भविष्य की राह इतनी आसान नहीं दिख रही। RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर के अनुमान को घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि पश्चिम एशिया संकट के चलते ईंधन की कीमतों में आने वाले उतार-चढ़ाव से अर्थव्यवस्था की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है।

मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में बूम

देश के औद्योगिक और सेवा क्षेत्र से अच्छे संकेत मिल रहे हैं। मई के महीने में मैन्युफैक्चरिंग PMI अप्रैल के 54.7 से बढ़कर 55 पर पहुंच गई, जो तीन महीने का सबसे ऊंचा स्तर है। बेहतर उत्पादन और नए ऑर्डर्स ने इसे सहारा दिया, हालांकि इनपुट कॉस्ट (लागत) का दबाव अब भी बना हुआ है। दूसरी ओर, सर्विसेज PMI भी अप्रैल के 58.8 से उछलकर मई में 59.8 पर पहुंच गई, जो छह महीने का उच्चतम स्तर है। इस सेक्टर को फ्रेट (माल ढुलाई), डिजिटल सॉल्यूशंस, ई-कॉमर्स, एंटरटेनमेंट और आईटी सेक्टर से बड़ा सपोर्ट मिला।

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इसके अलावा, नए बेस-ईयर (2022-23) के तहत अप्रैल महीने में औद्योगिक उत्पादन (IIP) में 4.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मैन्युफैक्चरिंग और कैपिटल गुड्स सेक्टर ने इस ग्रोथ की अगुवाई की, जिससे साफ है कि घरेलू उत्पादन की रफ्तार स्थिर बनी हुई है।

अमेरिका के नए टैरिफ प्रस्ताव से बढ़ी उलझन

एक तरफ भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता अंतिम चरण में है, जहां अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के मुताबिक 99 प्रतिशत डील फाइनल हो चुकी है। वहीं दूसरी तरफ, US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने भारत समेत 54 देशों पर 12.5 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दे दिया है। यह प्रस्ताव ‘सेक्शन 301’ जांच के तहत लाया गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि ये देश तीसरे देशों में जबरन श्रम (फोर्स्ड लेबर) से बनने वाले सामान के आयात को रोकने में नाकाम रहे हैं।

कैबिनेट के दो बड़े फैसले और LPG के बढ़ते दाम

केंद्रीय कैबिनेट ने एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की बढ़ती कीमतों के असर को संभालने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के फंड को मंजूरी दी है। इसके साथ ही, दिल्ली-NCR में प्रदूषण नियंत्रण और परिवहन क्षेत्र में बदलाव को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी योजना को मंजूरी मिली है। इसके तहत ट्रक और बस मालिकों को अपने वाहनों को क्लीनर व्हीकल्स (साफ ईंधन वाले वाहनों) में बदलने के लिए 9,585 करोड़ रुपये की सरकारी मदद दी जाएगी।

इस बीच, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की बढ़ती कीमतों का बोझ आम जनता की जेब पर पड़ा है। घरेलू एलपीजी सिलेंडर (14.2 किलोग्राम) की कीमतों में 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद दिल्ली में सामान्य उपभोक्ताओं के लिए एक सिलेंडर की कीमत 942 रुपये हो गई है।

First Published : June 7, 2026 | 1:06 PM IST