अर्थव्यवस्था

RBI policy meeting: रेपो रेट 5.25% पर ही रहेगी? नुवामा ने बताया RBI क्या कर सकता है

महंगाई बढ़ने और वैश्विक तनाव के बावजूद रेपो रेट 5.25% पर रहने की उम्मीद; भविष्य की नीति को लेकर आरबीआई का रुख होगा अहम

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देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- June 03, 2026 | 9:20 AM IST

RBI Policy Meeting: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की आगामी मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) मीटिंग में ब्याज दरों में किसी बदलाव की संभावना कम है। बढ़ती महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद आरबीआई रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर बरकरार रख सकता है। हालांकि बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि केंद्रीय बैंक आगे ब्याज दरों को लेकर क्या संकेत देता है।

ब्रोकरेज फर्म नुवामा का कहना है कि हाल के दिनों में महंगाई का दबाव बढ़ा है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें चढ़ी हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ा है। वहीं रुपये में कमजोरी आने से आयात महंगा हुआ है, जिसका असर घरेलू महंगाई पर पड़ सकता है।

RBI Policy Meeting: महंगाई बढ़ने का खतरा

रिपोर्ट के मुताबिक, कई कंपनियों ने कीमतें बढ़ानी शुरू कर दी हैं। इसके अलावा इस साल मानसून सामान्य से कमजोर रहने की आशंका भी है। अनुमान है कि बारिश दीर्घकालिक औसत का करीब 90 फीसदी रह सकती है, जो 2015 के बाद सबसे कम स्तर होगा। अगर ऐसा होता है तो खाद्य महंगाई बढ़ सकती है।

बाहरी मोर्चे पर भी चुनौतियां

नुवामा का कहना है कि देश के बाहरी क्षेत्र की स्थिति भी पूरी तरह सहज नहीं है। निर्यात में खास तेजी नहीं दिख रही, जबकि तेल, सोना और इलेक्ट्रॉनिक्स के आयात लगातार बढ़ रहे हैं। दूसरी ओर विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी है और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) भी कमजोर बना हुआ है। इससे भुगतान संतुलन (बीओपी) पर दबाव बना रह सकता है।

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अर्थव्यवस्था की रफ्तार को लेकर चिंता

रिपोर्ट के अनुसार, महंगाई बढ़ने के बावजूद अर्थव्यवस्था की रफ्तार को लेकर चिंता बनी हुई है। आर्थिक सुधार अभी सभी क्षेत्रों में समान रूप से नहीं दिख रहा है। निजी निवेश में तेजी नहीं आई है और पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव कंपनियों की लागत बढ़ा सकता है।

इसके अलावा अगर मानसून कमजोर रहता है तो कृषि उत्पादन और ग्रामीण आय पर असर पड़ सकता है, जिससे मांग और आर्थिक वृद्धि दोनों पर दबाव बढ़ सकता है।

RBI Policy Meeting: अभी इंतजार की नीति अपना सकता है आरबीआई

आमतौर पर बढ़ती महंगाई ब्याज दरें बढ़ाने की मांग करती है, लेकिन नुवामा का मानना है कि इस बार स्थिति थोड़ी अलग है। तेल की ऊंची कीमतें खुद मांग को कमजोर कर सकती हैं। साथ ही युद्ध शुरू होने के बाद भारत के 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड भी 35 से 40 आधार अंक बढ़ चुकी है, यानी वित्तीय स्थितियां पहले ही कुछ सख्त हो गई हैं।

ऐसे में आरबीआई फिलहाल “इंतजार करो और देखो” की रणनीति अपना सकता है और रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा।

महंगाई का अनुमान बढ़ सकता है

रिपोर्ट के मुताबिक, आरबीआई अपनी महंगाई का अनुमान बढ़ा सकता है क्योंकि कीमतों पर दबाव लगातार बना हुआ है। हालांकि फिलहाल वित्त वर्ष 2026-27 की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान में कटौती की संभावना कम है।

नुवामा का मानना है कि इस मीटिंग में ब्याज दरों से ज्यादा ध्यान लिक्विडिटी मैनेजमेंट और भविष्य की नीति को लेकर दिए जाने वाले संकेतों पर रहेगा। ऐसे समय में जब महंगाई और विकास, दोनों को लेकर जोखिम बने हुए हैं, आरबीआई संतुलित रुख अपनाना पसंद कर सकता है।

First Published : June 3, 2026 | 9:20 AM IST