भारतीय रिजर्व बैंक ने इस बार मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो रेट को 5.25% पर ही बनाए रखा है। यानी EMI अभी नहीं बढ़ेगी और न ही घटेगी। लेकिन यह फैसला जितना सीधा दिखता है, उतना है नहीं। इसके पीछे कई बड़े संकेत छिपे हैं। एक तरफ दुनिया भर में तनाव, महंगा तेल और अनिश्चितता बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूती दिखा रही है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी साफ कहा कि हालात ठीक हैं, लेकिन आगे का रास्ता आसान नहीं रहने वाला।
RBI के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.6% रहने का अनुमान है। यह दिखाता है कि देश में खपत, निवेश और सरकारी नीतियों का असर मजबूत रहा है। लेकिन अब चालू साल के लिए ग्रोथ घटकर 6.9% रहने का अनुमान है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि महंगा कच्चा तेल, बढ़ती कमोडिटी कीमतें और होर्मुज जलडमरूमध्य में सप्लाई की दिक्कतें आगे ग्रोथ को धीमा कर सकती हैं।
अच्छी बात यह है कि देश के अंदर मांग अभी भी बनी हुई है। शहरों में लोग खर्च कर रहे हैं और गांवों में भी हालात ठीक हैं। RBI के अनुसार, अच्छी फसल, बेहतर रोजगार और सरकार का मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस आगे भी मांग को सपोर्ट देगा। यानी अंदर से अर्थव्यवस्था मजबूत है, लेकिन बाहर से आने वाले झटके चिंता बढ़ा रहे हैं।
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अर्था भारत इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के सचिन सावरिकर का मानना है कि अब RBI के पास ज्यादा गुंजाइश नहीं बची है। उनके मुताबिक, सिस्टम में पहले ही करीब 125 बेसिस प्वाइंट की राहत दी जा चुकी है और बाजार में पैसा भी पर्याप्त है। ऐसे में अगर आगे दरें और घटती भी हैं, तो उसका असर पहले जैसा बड़ा नहीं होगा। सचिन सावरिकर साफ कहते हैं कि अब असली खेल निवेश का है। भारत की इकोनॉमी मजबूत है, लेकिन सिर्फ यही काफी नहीं है। विदेशी निवेश लाने के लिए टैक्स आसान करना होगा, नियम सरल करने होंगे और निवेशकों को भरोसा देना होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो पैसा दूसरे देशों में जा सकता है।
नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन शिशिर बैजल के मुताबिक, RBI का यह फैसला रियल एस्टेट सेक्टर के लिए राहत भरा है। जब ब्याज दरें नहीं बढ़तीं, तो होम लोन सस्ते रहते हैं। इससे लोगों के लिए घर खरीदना आसान होता है और डेवलपर्स को भी अपने प्रोजेक्ट प्लान करने में भरोसा मिलता है। यानी फिलहाल इस सेक्टर की रफ्तार बनी रह सकती है।
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360 ONE एसेट के विक्रम छाबड़ा के अनुसार, अभी भी अनिश्चितता खत्म नहीं हुई है। वेस्ट एशिया में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और एल नीनो के कारण इस साल कमजोर मानसून की आशंका है। अगर बारिश कम हुई, तो खेती पर असर पड़ेगा और इससे महंगाई भी बढ़ सकती है।
RBI ने इस साल महंगाई 4.6% रहने का अनुमान लगाया है। तिमाही के हिसाब से देखें तो शुरुआत में महंगाई कम रहेगी, लेकिन बीच में बढ़ सकती है और फिर साल के अंत तक थोड़ी कम हो सकती है। यानी महंगाई पूरी तरह नियंत्रण में तो है, लेकिन जोखिम बना हुआ है।
सीधी बात यह है कि RBI ने फिलहाल स्थिरता बनाए रखी है, लेकिन असली चुनौती अब सामने है। अब सिर्फ ब्याज दरें नहीं, बल्कि निवेश, वैश्विक हालात, तेल की कीमतें और मानसून मिलकर तय करेंगे कि भारत की अर्थव्यवस्था कितनी तेजी से आगे बढ़ेगी। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो ग्रोथ बनी रहेगी। लेकिन अगर बाहरी झटके बढ़े, तो मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं।