भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रुपये और वैश्विक हालात को लेकर अहम संकेत मिले हैं। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि 2026 में वैश्विक व्यापार की रफ्तार धीमी पड़ सकती है, जिसका असर भारत पर भी दिख रहा है।
RBI के अनुसार, टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता, वेस्ट एशिया में तनाव और महंगे ऊर्जा दाम के कारण भारत के निर्यात पर दबाव आया है। साल के पहले दो महीनों में भारत के मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में 0.2% की गिरावट दर्ज की गई।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में रुपया पहले के मुकाबले ज्यादा कमजोर हुआ है, लेकिन एक्सचेंज रेट को लेकर RBI की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने दोहराया कि RBI किसी खास स्तर पर रुपये को रखने की कोशिश नहीं करता, बल्कि जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप कर ज्यादा उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करता है।
गवर्नर ने कहा कि विदेशी मुद्रा बाजार में RBI का हस्तक्षेप सिर्फ ज्यादा और अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव को कम करने के लिए होता है, ताकि बाजार में अनावश्यक घबराहट न फैले और करेंसी की चाल बुनियादी कारकों से ज्यादा न बिगड़े।
RBI MPC बैठक में यह भी बताया गया कि भारत के एक्सटर्नल सेक्टर के संकेत अभी भी मजबूत हैं, लेकिन वैश्विक राजनीतिक और व्यापारिक अनिश्चितता को देखते हुए सतर्क रहने की जरूरत है। संजय मल्होत्रा ने कहा कि वेस्ट एशिया संकट से पहले भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में थी, लेकिन मार्च में तनाव बढ़ने के बाद हालात थोड़े खराब हुए और इसका असर रुपये और बाजार दोनों पर दिखा।