RBI Governor Sanjay Malhotra
RBI MPC Meeting 2026: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने शुक्रवार को रीपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया और इसे 5.25% पर बरकरार रखा। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि दुनिया भर की आर्थिक परिस्थितियां अप्रैल की पिछली मौद्रिक नीति बैठक के बाद और चुनौतीपूर्ण हो गई हैं।
संजय मल्होत्रा ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और नाजुक युद्धविराम के कारण वैश्विक माहौल कमजोर हुआ है। इससे आपूर्ति श्रृंखलाओं में बाधा और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इन कारणों से आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ सकती है और महंगाई बढ़ने का खतरा भी बना हुआ है।
RBI गवर्नर के अनुसार, वैश्विक झटकों के बावजूद खुदरा महंगाई (CPI Inflation) अभी केंद्रीय बैंक के लक्ष्य से नीचे बनी हुई है। इसका कारण यह है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों का असर घरेलू बाजार पर सीमित रहा है। हालांकि आने वाले समय में महंगाई बढ़कर RBI की तय सीमा के ऊपरी स्तर के करीब पहुंच सकती है।
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मौद्रिक नीति समिति का मानना है कि महंगाई बढ़ने के जोखिम पहले की तुलना में ज्यादा हो गए हैं। ऐसे में स्थिति को और स्पष्ट होने देने के लिए फिलहाल इंतजार करना उचित रहेगा। इसी वजह से समिति ने रेपो रेट को स्थिर रखने का फैसला किया। RBI ने यह भी कहा कि वह आगे के फैसले आर्थिक आंकड़ों और बाजार की परिस्थितियों को देखकर लेगा। साथ ही MPC ने अपना “न्यूट्रल” रुख भी बरकरार रखा है।
RBI गवर्नर ने कहा कि राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में भारत की GDP वृद्धि दर 7.6% रही। इसमें निजी खपत, निवेश, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र का बड़ा योगदान रहा।
उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया संकट के बावजूद देश की आर्थिक गतिविधियां काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं। विनिर्माण और सेवा क्षेत्र से जुड़े PMI आंकड़े भी इन क्षेत्रों की मजबूती का संकेत देते हैं। कारोबारियों का भरोसा भी बना हुआ है।
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RBI के मुताबिक, लोगों का खर्च, खासकर गैर-जरूरी वस्तुओं और सेवाओं पर होने वाला खर्च, अभी मजबूत बना हुआ है। लागत बढ़ने के दबाव के बावजूद निवेश की रफ्तार भी जारी है। इसके अलावा अप्रैल महीने में भारत के निर्यात में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि माल ढुलाई और बीमा की लागत ऊंचे स्तर पर बनी हुई है।
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत की वास्तविक GDP वृद्धि दर 6.6% रहने का अनुमान जताया है।
तिमाही आधार पर वृद्धि दर का अनुमान इस प्रकार है:
केंद्रीय बैंक का मानना है कि घरेलू मांग, निजी निवेश और सेवा क्षेत्र की मजबूती आर्थिक विकास को सहारा देती रहेगी।
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई दर (CPI Inflation) का अनुमान 5.1% रखा है।
तिमाही आधार पर महंगाई का अनुमान इस प्रकार है:
केंद्रीय बैंक के अनुसार, साल के दूसरे हिस्से में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, इसलिए कीमतों पर लगातार नजर रखी जाएगी।
बजाज ब्रोकिंग के रिसर्च प्रमुख सुमित सिंघानिया का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं, पश्चिम एशिया में तनाव, ऊंची ऊर्जा कीमतों और एल नीनो के जोखिमों को देखते हुए RBI ने रीपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखते हुए सतर्क रुख अपनाया है। इन चुनौतियों के चलते केंद्रीय बैंक ने FY27 के लिए GDP वृद्धि दर का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया है, जबकि महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.1% किया गया है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल घरेलू मांग और निवेश मजबूत बने हुए हैं, लेकिन आने वाले समय में महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं, सरकारी प्रतिभूतियों पर FIIs को कर छूट देने का सरकार का फैसला पूंजी बाजार के लिए सकारात्मक है और इससे विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत होने की उम्मीद है।
Ezeepay के को-फाउंडर और CEO शम्स तबरेज के अनुसार, RBI द्वारा रीपो रेट को स्थिर रखने के इस फैसले से होम लोन, पर्सनल लोन और बिजनेस लोन की ब्याज दरों में तत्काल कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, जिससे लोगों को अपनी वित्तीय योजना बनाने में आसानी रहेगी।
उन्होंने कहा कि स्थिर ब्याज दरों का माहौल बैंकों और वित्तीय संस्थानों को जिम्मेदारी के साथ ऋण वितरण बढ़ाने में मदद करेगा। साथ ही MSME, छोटे कारोबारों और आम उपभोक्ताओं के लिए कर्ज की उपलब्धता बनी रहेगी। उनका मानना है कि अर्ध-शहरी और कम बैंकिंग सेवाओं वाले क्षेत्रों में भी ऋण की मांग मजबूत बनी रहेगी।
तबरेज के मुताबिक, RBI का यह फैसला आर्थिक विकास और महंगाई नियंत्रण के बीच संतुलन बनाए रखने की रणनीति को दर्शाता है, जो वित्तीय क्षेत्र और उधारकर्ताओं दोनों के लिए स्थिरता प्रदान करेगा।
— ReserveBankOfIndia (@RBI) June 5, 2026